'अनीता चौधरी' की पाँच कविताएँ॰॰॰॰॰

कविता कविता

अनीता 497 2018-12-27

‘अनीता चौधरी’ की कविताओं से गुज़रना यूँ तो किसी शांत नदी से बातें करने का एहसास दिलाता है । मानो अपनी अतल गहराइयों में बड़े सामाजिक विचलन को समेटे, प्राकृतिक धैर्य के शांत आवरण को ओढ़े हुए, सागर से अपने प्रेम और उसकी तरफ़ चलते रहने की गाथा को, पूरी संजीदगी से बयां कर रहीं हों । इन कविताओं में यकायक प्रतीत होती हताशा यक़ीनन गहरे संदर्भों में सागर तट पर निश्छल प्रेम में दम तोड़ने जैसा होता है। आपकी कविताओं के शब्दों का भूगोल रचनात्मक रूप से ही सही, अपने तल से उठती सुनामी को मानवीय रूप में पुरुष सत्तात्मक सामाजिकता से होती चूक के परिणाम के रूप में व्याख्यायित कर उससे रूबरू करातीं हैं ।

१-  

हाँ मुझे पता है

मैंने गलत किया

तुमसे प्रेम किया

तुमने किया ?

कोशिश की

कई बार जानने की

तुम्हारे मन को

टटोलने की।

हर बार वहां

मुलाक़ात हुई

अनसुलझी पहेलियों से।

झटक दिया

अपने दिमाग से

तुम्हारा ख्याल

कर दिया दूर

अपना भ्रम


२-  

अजीब सी उलझन में

हर समय घिरी सी

पास हूँ नहीं

दूर जा नहीं सकती

तुम में हूँ

मुझमें हो तुम

बता नहीं सकती।

कुछ अनसुलझी सी

निर्थक पहेली हूँ मैं।


३- 

मत खेलो ये लुका छिपी का खेल

 बहुत हो गया।

सब कुछ समझ आने लगा है।

मुहं पर हाथ रख कर

तुम्हारी कुटिल मुस्कान।

यूं मीठी मीठी बातें

इनके पीछे दुबके

अनेक छल कपट

घिनौने स्वार्थ।

बहुत चुभती है।

सही वक्त पर तुम्हारी चुप्पी

उठना शुरू हो गयी है लपटें

अंतहीन सिलसिलों के बीच।

बढ़ ने लगे है कदम

महत्वकांक्षाओं की दौड़ में।

देख नही पा रही है। आंखे

झुलसे हुए चेहरे।

बैहरे हो गए है। कान

सुनते सुनते चीख पुकार

कहाँ जाओगे जब

भष्म हो जाएगा

तुम्हारा ये साम्राज्य।

इसलिए,

तोड़ डालो ये मोन

 हो जाओ एक तरफ

एकदम तटस्थ।



४-  

जब भी आंखों में तेरी

अपना अक्स खोजती हूँ।

एक धुंधली सी

तस्वीर से रूबरू होती हूँ।

तपाक से पढ़कर

मेरे चेहरे के निशां

तुम घुमाने लगते हो पुतलियां।

उलझाना चाहते हो

अनगिनत बिखरी कहानियों में

जिससे पढ़ सकूं

उन आंखों की अतल गहराई में

बसी उस आकृति को

जिसे छिपाना चाहते हो बार बार

पलकों के रेशों की

महीन चादर से।


५- 

एक खास किस्म की

दवा है दोस्ती

अवसाद के दिनों में

दिमाग की फफूंदी को

फेंकने की जगह है दोस्ती।

किसी के द्वारा

हार्ट किये जाने पर

कंधे पर सिर रखकर

रोने की जगह है दोस्ती।

प्यार में धोखा दिए जाने पर

फिर से संबल देकर

खड़ा करने की ताकत है दोस्ती

बात चीत के दरम्यान

एक दूसरे को

भद्दे से भद्दे शब्दों से

सुशोभित करना है दोस्ती।

अपने फालतू समय को

दोस्ती की जरूरत बताकर

उपयोग करने की जगह है दोस्ती।

अनीता द्वारा लिखित

अनीता बायोग्राफी !

नाम : अनीता
निक नाम : अनीता
ईमेल आईडी : anitachy04@gmail.com
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ऑथर के बारे में :

अनीता चौधरी 
जन्म - 10 दिसंबर 1981, मथुरा (उत्तर प्रदेश) 
प्रकाशन - कविता, कहानी, नाटक आलेख व समीक्षा विभिन्न पत्र-पत्रकाओं में प्रकाशित| 
सक्रियता - मंचीय नाटकों सहित एक शार्ट व एक फीचर फ़िल्म में अभिनय । 
विभिन्न नाटकों में सह निर्देशन व संयोजन व पार्श्व पक्ष में सक्रियता | 
लगभग दस वर्षों से संकेत रंग टोली में निरंतर सक्रिय | 
हमरंग.कॉम में सह सम्पादन। 
संप्रति - शिक्षिका व स्वतंत्र लेखन | 
सम्पर्क - हाइब्रिड पब्लिक  स्कूल, दहरुआ रेलवे क्रासिंग,  राया रोड ,यमुना पार मथुरा 
(उत्तर प्रदेश) 281001 
फोन - 08791761875 

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उमाशंकर सिंह परमार 435 2019-06-02

बृजेश लय आधारित विधा के सफल और नामचीन कवि हैं। उनके लयबन्धों पर लिखना चुनौती भरा काम है। अमूमन गीतों और गज़लों की समीक्षा में व्याकरण व भावनात्मक आवेगों की प्रतिच्छाया सक्रिय रहती है आलोचक वाह-वाही की शैली में स्ट्रक्चर पर अपनी बात रखकर आलोचना की इतिश्री कर देते हैं। वह गीतों और बन्धों की वैचारिक विनिर्मिति और समाजशास्त्र पर जाना ही नहीं चाहते हैं। इससे हिन्दी कविता के क्षेत्र में गज़ल और गीतों को दोयम माना जाता रहा है। यह कमी विधा की नहीं है आलोचना की कमी है कि गीतों और बन्धों में समाजशास्त्रीय आलोचना को नहीं लागू किया गया वह अब भी अपने परम्परागत आलोचना प्रतिमानों द्वारा मूल्यांकित की जा रही है।

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