मुबारक आपको : ग़ज़ल (शक्ति प्रकाश)

कविता ग़ज़ल

शक्ति प्रकाश 290 2018-12-31

नए साल की बधाइयों के साथ ॰॰॰ चित्र 'अयान मदार'
अपनी ग़ज़ल से गुज़रे हुए साल २०१८ को और नए साल २०१९ को आते हुए 'शक्ति प्रकाश' रचनात्मक अंदाज़ में कुछ यूँ समझने की कोशिश में हैं जैसे कहीं 'ज़फ़र इक़बाल' ने अपने इस शेर में समझा है -
चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें
दीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे

मुबारक़ आपको 

जो कहा पिछले बरस हमने बिला शक आपको।

ये बरस कुछ चेंज सँग होवे मुबारक आपको।

 

हम किताबों में लिखें, पट्ठे रिसाले दाब लें,

आप बस लिखते रहें, है ढेर गुड लक आपको

 

आपके बच्चे पढ़ें, आगे बढ़ें , बढ़ते रहें,

यूँ बढ़ें इक दिन बना दें मार्गदर्शक आपको

 

लैन  में लगने की ताकत आपको वल्ला मिले

इस बरस में ना सताए क्रांति की झक आपको

 

मुँह चले या ना चले पर कान को ताकत मिले,

साल भर सुननी है फिर से बक बका बक आपको।

 

बंदरों से अदरकों का स्वाद भी मत पूछिए

वो खिला ही देंगे वरना सारा अदरक आपको।

 

 

उससे छुटकारे की अल्ला आपको तौफीक दे

चलते चलते मिल गया था जो अचानक आपको

 

मिल गया बहनों को हक़ थोड़ा रुकें पर बेन जी,

देखते हैं कब मिलेगा आपका हक आपको।

 

क्या सही या क्या गलत, देखो महाजन किस तरफ

शक्ति पीछे जाइए कर दें टकाटक आपको।

शक्ति प्रकाश द्वारा लिखित

शक्ति प्रकाश बायोग्राफी !

नाम : शक्ति प्रकाश
निक नाम : छुन्टी गुरु
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आश्चर्य जनक किंतु सत्य टाइप फ़िलहाल के चंद अनपढ़ लेखकों में से एक। 

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बृजेश लय आधारित विधा के सफल और नामचीन कवि हैं। उनके लयबन्धों पर लिखना चुनौती भरा काम है। अमूमन गीतों और गज़लों की समीक्षा में व्याकरण व भावनात्मक आवेगों की प्रतिच्छाया सक्रिय रहती है आलोचक वाह-वाही की शैली में स्ट्रक्चर पर अपनी बात रखकर आलोचना की इतिश्री कर देते हैं। वह गीतों और बन्धों की वैचारिक विनिर्मिति और समाजशास्त्र पर जाना ही नहीं चाहते हैं। इससे हिन्दी कविता के क्षेत्र में गज़ल और गीतों को दोयम माना जाता रहा है। यह कमी विधा की नहीं है आलोचना की कमी है कि गीतों और बन्धों में समाजशास्त्रीय आलोचना को नहीं लागू किया गया वह अब भी अपने परम्परागत आलोचना प्रतिमानों द्वारा मूल्यांकित की जा रही है।

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