ISSN - 2455-2011
RNI - UPHIN/2017/74803

रश्मि सिंह की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता के उस सशक्त पक्ष को उजागर करती हैं जहाँ अनुभूति, वैचारिक प्रतिबद्धता और आत्मसंघर्ष एक सम्यक साहित्यिक संरचना में विन्यस्त होते हैं। इन कविताओं में कवयित्री का स्वर कहीं प्रतिज्ञात्मक है, कहीं आत्मालोचनात्मक, कहीं सामाजिक प्रश्नाकुलता से भरा हुआ, तो कहीं अस्तित्वबोध की सूक्ष्म दार्शनिकता में रूपांतरित होता हुआ दिखाई देता है। यह बहुलता ही उनके काव्य संसार की केंद्रीय विशेषता है।

रश्मि सिंह की कविताएं---

Rashmi Singh poems

1- अलमीरा की एक किताब

शबनम सी में उठती हूं
निगाहें भागती है एक ओर
तमाम हरकतें भी होती है
और अफसाने मेरी किताब लिख देती है
नुक्ते ए नज़र से दीदार करूं अगर
कहूंगी मुस्तकिल रहें किताबों के लिखे अनेक अफसाने
वो कोरा कागज़ जो मेरे हाथों के स्पर्श मात्र से
गल जाता है ज़रा सा
मुनाफिक नहीं मैं
जो करूं तौसीफ
और अपनी ही किताबों से एतबार खो बैठूं
आवाम चाहती है कि मैं चाहूं उन्हें भी
पर न जाने क्यों
मुझे ये लाज़मी नहीं लगता
मुकम्मल होना मजबूर है लेकिन
लेकिन अलमीरा में रखी
मेरी किताब एक किताब साथ!!

2- खोया इमरोज़

घंटो बैठना और विचार करना
एक ऐसी दुनिया पर
जो अपनी तो हो मगर
या तो बीती हुई या कुछ बताती हुई।

रोज मेरा, मुझे वो दुनिया लगता ही नहीं
बातों से सीखना भी शायद भाता नहीं
इसलिए एक हादसा सिखाता है।

एक ऐसा सपना जो मुझे सोने ही नहीं देता,
मुझे मेरे आज में रहने ही नहीं देता।
खुद को कसना चाहती हूँ खुद के आज से
पर मालूम होता है की शायद मैं इस दुनिया में हूँ ही नहीं।
हर एक नन्ही चीज मुझे हैरत में डाल रही है
बारिश को देखूं तो भीगना चाहती हूँ।
नदी को परखूँ तो उमड़ना चाहती हूँ।
आसमां का सोचूं तो बाहों को फैला कर ये दुनिया बहुत ऊँचाई से देखना चाहती हूँ
घने वृक्ष के भाँति स्वाभिमान चाहती हूँ
और मजे की बात तो यह है कि 
मैं खुद के भाँति खुद बनकर
औरों की तरह
“इमरोज़ जीना चाहती हूँ”

3- मैं

वो बोला मैं वृक्ष हूं
सब कुछ होते देखता हूँ
पर नदी के भांति चंचल नहीं ।
वो बोली मैं नदी हूं
चंचल हूँ
पर सागर के भांति अनंत नहीं ।
वो बोला मैं सागर हूं
अनंत हूँ पर
आकाश के भांति असीमित नहीं ।
वो बोला मैं आकाश हूँ
असीमित भी हूँ
पर हवा के भांति प्रभावी नहीं ।
वो बोली मैं हवा हूं
अत्यंत प्रभावी हूं
“पर तेरे भांति आनंदित नहीं।।”

photo from Canava
Photo from Canava

4- हां!! मैं जरूर लौटाऊँगी

अज्ञात हूं आगाज से
इस मोड़ के अंदाज़ से
पर जानती हूँ हसरतों के बल से मैं निभाऊँगी
एक रोज वापस आयेगा भू धर्म में लौटाऊँगी।।

फिल्हाल में आबाद है तकदीर के आदाब से
पर बेवजह जलती भभकती आग भी भुझाऊंगी
एक रोज वापस जायेगा भू धर्म में लौटाऊँगी।।

यायावर है तू. मगर पर कुछ तो तूने भी सुना
तेरी बिकी तौहीन का भी कर्जा में मधवाउंगी
एक रोज वापस आयेगा भू धर्म में लौटाऊँगी।।

घेरा है घूंध का घेरे में सांसों को थामें खड़ी में

इस्तीरार से मगर आगे कदम बढ़ाऊँगी
एक रोज वापस आयेगा भू धर्म में लौटाऊँगी।।

फुर्सत से कभी बैठे कर सारी घटी बताऊंगी
जब नर्म नर्मी आयेगी तब उसे नपवाऊंगी
संयुक्त ब्याधा त्यागकर धुंध निगल जाऊंगी
एक रोज वापस आयेगा भू धर्म में लौटाऊँगी।।

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
Picture of रश्मि सिंह

रश्मि सिंह

फिलहाल दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातक कर रही हैं ।
हिंदी साहित्य लिखने एवं पढ़ने में काफी रुचि | कलम और कागज़ का रिश्ता हमेशा से ही सुकून जैसा रहा है।

70 thoughts on “रश्मि सिंह की कविताएं—”

    1. कुछ कविताएँ पढ़ी जाती हैं, और कुछ महसूस की जाती हैं or यह उन्हीं में से एक है 🌙👌👌

  1. हर नई रचना के साथ आपकी लेखनी और निखरती जा रही है, बहुत खूब

  2. मन में एक ही शब्द आता है,,, “अद्भुत”, आज के समय में जहां कविताओं में दार्शनिक विचारों का लोप सा होता जा रहा है, ऐसे में *खोया इमरोज़* और “मैं” जैसी कविता पढ़ दिल प्रफुल्लित हो उठा। ♥️♥️

  3. Mujhe khushi milti hai ki meri hi kaksha ke chaatra itni gehrai se ki gayi kalpana ko likh paate hai….Tmhari kavitayen kaafi prernatmak hain….Tum isi tarah kaafi likho aur acha kro,tmse yahi akansha hai!!!

  4. हर पंक्ति में इतनी गहराई है कि पढ़ते-पढ़ते खुद से मुलाक़ात हो जाती है।😌 या जैसे हम अपने आप को पढ़ रहे हो और पढ़ते पढ़ते अपने आप को शांत और अच्छा महसूस होता है ।🙌🏻💜

  5. आपकी हरे एक पंक्ति में ऐसा लगता है कि जैसे हम अपने आप को पढ़ रहे हो।😌 या जैसे हम अपने आप को पढ़ रहे हो और पढ़ते पढ़ते अपने आप को शांत और अच्छा महसूस होता है ।🙌🏻💜

  6. तुम कब इतनी परिपक्व हो गई!!!
    मुझे तुम पर और तुम्हारी लेखनी पर बहुत गर्व है🙌🏻

  7. You’ve written some very nice poems, and I really enjoyed reading them. And I’ll read more of your poems in the future.

  8. Dear Rashmi, your poems are truly inspiring and joyful. Each and every title makes me want to trace every single word of your poems 💖 lots of love ❤️ keep writing and treasuring the keys to our hearts with your touching words . Waiting for more such poetry that makes us want to indulge and give us a moment to reflect upon ourselves ❤️❤️❤️❤️

  9. सभी कविताएं बहुत गहरी और सुंदर थी पढ़कर बहुत अच्छा महसूस हुआ 💗। आपके शब्दों का चयन भी मुझे हमेशा बहुत पसंद आता है। कमाल!!!।

  10. Sushant Chaudhary

    Rashmi, तुम्हारी कविताओं में भावनाओं की गहराई साफ़ झलकती है। लिखना सिर्फ शौक़ नहीं, तुम्हारी खूबसूरत कला है ✨

  11. Sushant Chaudhary

    Rashmi, तुम्हारी कविताओं में भावनाओं की गहराई साफ़ झलकती है। लिखना सिर्फ शौक़ नहीं, तुम्हारी खूबसूरत कला है…..!

  12. Your poems are a very clear observation of prevailing norms in society which r reflection to where the society is tilting providing us with its strengths and weaknesses 🌝

  13. My keyboard doesn’t have enough words to describe the you talent 𝚁𝚊𝚜𝚑𝚖𝚒
    Keep it up and best of luck for the future

  14. Your words feel very real and honest. I can feel the emotions behind them.You expressed your feelings in a very genuine way. Love the word you use in the poems.✨️

  15. आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है। मेरी लिखी हुई कविताएँ हमरंग. कॉम जैसी एक प्रतिष्ठित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित हुई हैं। एक लेखिका के रूप में यह मेरा पहला अनुभव है, जिसे शब्दों में बयां करना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि खुशी बहुत गहरी है।
    जब मैंने अपनी कविताओं को इस मंच पर देखा, तो लगा जैसे मेरे शब्दों को एक नई पहचान मिल गई हो। यह सिर्फ कविताओं का प्रकाशित होना नहीं है, बल्कि मेरे आत्मविश्वास और मेरे लेखन की पहली सार्वजनिक स्वीकृति है। यह जानकर और भी गर्व महसूस होता है कि यह वेबसाइट ISSN और RNI नंबर से पंजीकृत है, जो इस उपलब्धि को मेरे लिए और भी महत्वपूर्ण बना देता है।
    मैं दिल से धन्यवाद करूंगी हनीफ मदार सर का जो कि एक समकालीन हिंदी साहित्यकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं ,जिन्होंने मुझे लिखने के लिए सबसे ज्यादा प्रोत्साहन और प्रेरणा दी साथ ही मैं आभार व्यक्त करूंगी अनीता चौधरी मैम और सनीफ मदार सर को जिन्होंने हमेशा मेरी कविताओं को सराहना किया
    मैं हमरंग.कॉम की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद करना चाहती हूँ, जिन्होंने नए रचनाकारों को इतना सुंदर मंच दिया और मेरे शब्दों पर विश्वास किया।
    मैं अपने माता पिता एवं सभी मित्रों को हृदय से धन्यवादकरती हूँ जो हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
    यह अनुभव मुझे आगे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करेगा
    उम्मीद है मेरी कविताओं की यह यात्रा यूँ ही रंग भरती रहेगी।
    ~रश्मि

    1. शुक्रिया रश्मि लेकिन यह तुम्हारी समझ और मेहनत का प्रतिफल है । पढ़ती और यूं ही लिखती रहो बहुत जल्द तुम्हारी किताब आएगी ये मेरा वादा है ! खुश रहो 💐

  16. रश्मि, तुम्हारी कविताएँ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक एहसास हैं| तुम्हारी कविताओं में एक रूहानी सुकून है, खासकर जिस तरह तुम ‘खोया इमरोज़’ में वर्तमान और सपनों की बात करती हो |
    तुम्हारी कविता ‘मैं’ एक आध्यात्मिक यात्रा जैसी लगती है। प्रकृति के अलग-अलग रूपों (वृक्ष, नदी, सागर, आकाश) से तुलना करते हुए अंत में ‘आनंद’ और ‘स्वयं’ तक पहुँचना बहुत ही प्रभावशाली है। तुम्हारी यह शैली कि तुम बड़ी बातों को बहुत ही सरल प्रतीकों में कह देती हो, वाकई कमाल है।”

  17. “Rashmi”, ur name itself means “a ray of light” 🌞. Ur words truly do justice to ur name🪔.
    m not v much into reading sahitya and everything 😁 but If i remember sahi se 🤔, the legendary Mahadevi Verma ka famous collection is also called Rashmi🌄…haina ??😁🧡
    …… what a beautiful coincidence ✍️✨😘..or may be it is God’s plan….
    U never know 🙂‍↕️(** but I know coz i see the potential 🤫)

    They say har family me there is always a storyteller🥳 and for us, you r the one. So incredibly proud of you 🫡✨.

    May ur words become voice for those who can’t express 🌟. May ur thoughts develop the depth of a soulful poet 💐❤️
    🫂🫂🫂

    Always n forever ur well-wishers 💌

  18. आपकी कल्पना अद्भुत है आपकी लेखन शैली बहुत काव्यात्मक है

  19. Krish Kumar Meena

    रश्मि आपकी कविताओं मे काफी गहराई है अगर इन्हे ध्यान से पढ़ा जाए तो हम काफी कुछ सीखने को मिलता है ये कबिताएँ आपकी तरह ही खूबसूरत है आपकी कविताओं को पढ़कर मुझे काफी अच्छा लगा और आपकी कविताओं के प्रति रुचि को देखकर भी मुझे काफी अच्छा लगा मेरी आशा है की आप इसी तरह सुंदर कविताओं की रचना करती रहो

  20. आपकी कलम मुझे किसी प्रेरणा सी लगती है।
    और आपकी लेखनी को करीब से देख पाना एक कमाल अनुभव रहा है दोस्त!!!✨👏🏻:)

  21. What depth! Truly a work of genius.Thanks for sharing such a beautiful piece.keep it up girl 🫶🏻 waiting for more such works in future.

  22. तू वृक्ष भी है नदी भी है सागर भी है आनंदित भी है आकाश भी है और तू माउंट एवरेस्ट की छोटी भी है

  23. रश्मि आपकी कविताओं मे काफी गहराई है अगर इन्हे ध्यान से पढ़ा जाए तो हम काफी कुछ सीखने को मिलता है ये कबिताएँ आपकी तरह ही खूबसूरत है आपकी कविताओं को पढ़कर मुझे काफी अच्छा लगा

  24. बेहतरीन रचना, रश्मि जी! आपके शब्दों का चयन और भाव वाकई काबिले-तारीफ हैं। आशा है कि आपकी कलम यूँ ही चलती रहेगी और हमें आपकी नई कविताएं पढ़ने को मिलती रहेंगी।”

  25. Yashika Chaudhary

    Bhai pehle bhi padhi hai poems teri par jitni bhi baar padho har baar kuch nayi siiiii hi baat aur naya hi matlab hota hai aur aisa likhna harr kisi se nhi ho pata 😊

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top