Generated by All in One SEO v5.0.0.1, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # humrang.com विविध कला, साहित्य एवं जन संस्कृति का एक वैश्विक मंच ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://humrang.com/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [तीसमारखाँ: साहित्य, बाजारवाद और लेखकीय लालसाओं पर तीखा व्यंग्य](https://humrang.com/humrang-com-teesmaar-khan-kahani/) - प्रो० विजय शर्मा की कहानी ‘तीसमार खाँ’ बाजारवाद, साहित्यिक प्रतिबद्धता, छद्म लेखकीय लालसाओं और सांस्कृतिक विडंबनाओं पर व्यंग्यात्मक शैली में गंभीर सवाल उठाती है। “हेलो, आप कैसे हैं?”“मैं ठीक हूँ। आप कौन साहब बोल रहे हैं? पहचान नहीं पा रहा हूँ।”“अरे! पहचाना नहीं आपने? भई आप बड़े लोग हो क्यों पहचानोगे। हमने आपको एसएमएस किया - [अदृश्य दुभाषिया, एवं अन्य समकालीन हिंदी कविताएँ](https://humrang.com/humrang-com-samakaleen-hindi-kavitayen/) - अदृश्य दुभाषिया’, ‘आश्वासन की पीठ’ और ‘बिसुक गई है पीड़ा’ संवाद, आश्वासन, पीड़ा और मानवीय अनुभवों की गहरी परतों को उजागर करने वाली प्रभावशाली समकालीन हिंदी कविताएँ हैं। 1- अदृश्य दुभाषिया चिट्ठियां आती हैंआती रहती हैंकागजी बमों की तरह हताहत करनेसमूची संभावना के साथ कौन सा शब्द किस आशय से टकरा जायेकहांकहा नहीं जा - [सीमा आरिफ की कविताएँ – आभासी दुनिया में खोती मानवीय संवेदना और प्रेम की तलाश](https://humrang.com/seema-arif-kavitayen-aabhasi-duniya-manviya-samvedna/) - सीमा आरिफ की कविताओं में डिजिटल युग के युवाओं की बेचैनी, ह्रास होती संवेदनाएँ और प्रेम की गहरी तलाश का मार्मिक चित्रण। पढ़ें humrang.com पर। पढ़ें अन्य कविताएं सीमा आरिफ की ये कविताएँ केवल साहित्यिक रचनाएँ नहीं हैं — ये एक ज़िम्मेदार रचनाकार की वो आवाज़ें हैं जो आभासी शोर में दबती जा रही असली - [ईदा (कहानी) Eeda (Story)](https://humrang.com/eedaa-hindi-story-by-hanif-madaar/) - ईदा (कहानी) Eedaa (Story) -हनीफ़ मदार(Hanif Madaar) बीस वर्ष लम्बा काल खंड भी ईदा को मेरी मनः-स्मृतियों से मिटा नहीं पाया । उस समय ईदा को समझ पाने की न मेरी उम्र थी न ताक़त । पूरे गांव के लिए आधा पागल ईदा मेरे लिए भी इस से ज्यादा कुछ नहीं था । मैं तब - [जश्न-ए-आज़ादी (Jashan-e-Azadi)](https://humrang.com/jashan-e-azadi-kahani-hanif-madaar/) - जश्न-ए-आज़ादी Hanif Madaar Writer and Editor जन्म- 1 मार्च 1972, मथुरा, उत्तर प्रदेश | कार्य स्थली – मथुरा, उत्तर प्रदेश | लेखन- कहानी- कहानियां ‘हंस’ ‘वर्तमान साहित्य’ ‘परिकथा’ ‘उद्भावना’ ‘वागर्थ, के अलावा ‘समरलोक, अभिव्यक्ति, सुखनवर, लोकगंगा, युगतेवर, वाड.म्य, लोक संवाद और दैनिक जागरण में कहानियाँ प्रकाशित । कहानी संग्रह- ‘बंद कमरे की रोशनी’ , रसीद - [साल्व इन लव](https://humrang.com/salv-in-love-kahani/) - साल्व इन लव Anita Chaudhary writer जन्म – 10 दिसंबर ,मथुरा (उत्तर प्रदेश)प्रकाशन – कविता, कहानी, नाटक आलेख समीक्षा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित | कुछ कविताओं का ‘संकेत रंग टोली’ व ‘कोवालेन्ट ग्रुप’ द्वारा मंचनसक्रियता – मंचीय नाटकों सहित एक शॉट व दो फीचर फ़िल्म ‘कैद'(ज्ञान प्रकाश विवेक की कहानी व हनीफ मदार द्वारा लिखित)और - [मुहब्बत ही दीन-औ-इमां मेरा](https://humrang.com/mohabbat-hi-deeno-eman-mera/) - वसंत से जब मेरी बात होती थी तो कहता था, तबस्सुम बेहद संजीदा और दानिशमंद लड़की है, इसलिए उसे पसंद आई. ‘मॉड’ होना एक बात है, और प्रोग्रेसिव होना दूसरी बात. उसकी कल्चर में ही देखो कितने लोग अपने को मॉडर्न कहते हैं, मगर भीतर से तहजीब के पल्लू के पीछे वही कबीलाई मानसिकता ! - [एक सम्पूर्ण कविता  ](https://humrang.com/ek-sampoorn-kavita/) - ‘सीमा आरिफ़’ की लेखकीय सामाजिक सरोकारी प्रतिबद्धता उनकी रचनाओं की तरह बेहद गहरी होती जान पड़ती है | इन गहराती आशंकाओं के बीच प्रेमारोहण, उस मानवीय स्पर्श सा जान पड़ता है जो घोर अन्धकार और हताशा के क्षणों में भी आदिम को एक नई उर्जा से लबरेज़ कर देता है | कुछ ऐसा ही कोलाज़ - [निदा नबाज़ की कविताएँ](https://humrang.com/nida-nabaz-ki-kavitayen/) - अतीत के गहरे जख्मों से रिसते दर्द पर भविष्य के सुखद मानवीय क्षणों का मरहम रखती, 'निदा नवाज़' की कविताएँ......| अँधेरे की पाज़ेब निदा नबाज़ अँधेरे की पाज़ेब पहनआती है काली गहरी रातदादी माँ की कहानियों से झाँकतीनूकीले दांतों वाली चुड़ैल सीवह मारती रहती है चाबुकमेरी नींदों की पीठ परकाँप जाते हैं मेरे सपनेवह आती - [मंगत की खोपडी में स्वप्न का विकास](https://humrang.com/mangat-ki-khopadi-main-swapn-ka-vikas/) - अब जरा इस स्वप्नदर्शी मंगत राम के बारे में जान लीजिए। वह दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में रहता है और मयूर विहार में एक हाउसिंग सोसाइयी के आगे फुटपाथ पर सिलाई मशीन लेकर बैठता है। आठ साल पहले उसका दुबला-पतला और खाँसता-खैखारता बाप इसी फुटपाथ पर इसी सिलाई मशीन के साथ बैठा करता - [कैसी शिक्षा कैसा ज्ञान, भाषा पर है पूर्ण विराम|](https://humrang.com/kaisi-shiksha-kaisa-gyan/) - कैसी शिक्षा कैसा ज्ञान, भाषा पर है पूर्ण विराम| हिंदी हमारी राजभाषा है और अंग्रेजी सहायक भाषा है | ये दोनों ही भाषाएँ केंद्र के कार्यों में समान रूप से इस्तेमाल की जाती है | राज्य अपने कार्यों को अपनी प्रादेशिक भाषाओं में कर सकते है | अब सवाल यह उठता है कि जहाँ अभी - [उतरती हुई धूप](https://humrang.com/utarti-hui-dhoop/) - ‘ सिया , सिया , सिया , ये महज किताबी बातें बोल रही हैं तू । मेरा यकीन है किे रसलोलुप पुरूषों की गिद्ध नजर हमेशा कोमल औरतों को निशान साध उनका पीछा करती रहतीं। मनचाही लड़की न मिलने पर वे जल भुन कर उसे शिकार बनाकर मार डालने से नही हिचकते। मतलब वे उसे - ["ये है मथुरा मेरी जान....”](https://humrang.com/ye-hai-mathura-meri-jan/) - तो दोस्तों ! मैं मथुरा का निवासी हूँ। उस प्रेम नगरी मथुरा की बात कर रहा हूँ जिसके प्रेम में सय्यद इब्राहीम रसखान बन जाता है जो किसी भी रूप में इस ब्रज की माटी को छोड़ना नहीं चाहता . (आलेख में प्रयुक्त सभी चित्र गूगल से साभार ) "ये है मथुरा मेरी जान....” नगर, कस्बा - [साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ](https://humrang.com/sahity-main-stri-srijnatmakta/) - आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त की है। हालांकि धर्म सम्मत सामाजिक नियम-कानूनों ने स्त्री को घर की चारदीवारी के भीतर सीमित कर उसे सामाजिक विकास की मुख्य - [गुस्से की गूँज](https://humrang.com/gusse-ki-goonj/) - यद्यपि गुस्से को पी जाने का सटीक फार्मूला हमारे संत महात्मा बहुत पहले से बता गए हैं लेकिन अब ऐसा सम्भव नही रह गया है, क्योंकि पीने के लिए अब बहुत सी चीजें उपलब्ध हैं। गुस्सा पीना पिछडा हुआ और अप्रासंगिक तरीका रह गया है। ‘ब्रजेश कानूनगो‘ का व्यंग्य ……| गुस्से की गूँज writer- Brajesh - [साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ](https://humrang.com/sahity-me-stri-srijnatmakta/) - “आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटिश शासन और सब मामलों में कानून बना सकता है और ज़रूर बनाए, लेकिन हमारे धर्म - [क्रोध का प्रबंधन](https://humrang.com/krodh-ka-prabandhan/) - वक्ती हालातों, ज़ज्बातों और संवेदनाओं को शब्दों के सहारे कविता में पिरोने का सार्थक प्रयास करतीं ‘रूपाली सिन्हा’ की दो कविताएँ …….| – संपादक सिखाया जा रहा हैक्रोध का प्रबंधन भीताकि सहनशक्ति बढ़ सकेसंवेदनाएँ हो जाएँ कुंदऔर सरोकार कोमारा जा सके बेमौतअशांति के दूत पढ़ा रहे हैंशांति का पाठउनके क्रूर चेहरेझाँक-झाँक जाते हैउनके आंसुओं के पीछे - [अंधी गली का मुहाना](https://humrang.com/andhi-gali-ka-muhana/) - भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती ‘अशोक तिवारी‘ की कविता ……. अंधी गली का मुहाना ये कौन सी गली में आ गए हमकौन सी वादियों में घिर गएकि कुछ सुझाई नहीं देता?साँस ही नहीं ली जातीये कौन सा रास्ता हैजो अंधी सुरंग को जाता है?ये कौन हैंजो - [चुटकी-चुटकी प्रेम॰॰॰](https://humrang.com/chutaki-chutaki-prem/) - उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता है यही सोचकर वह खड़ा हुआ है | लेकिन, तब तक उसकी ट्रेन आ गई और, “मम्मी ट्रेन आ गई है बाद में बात करती हूँ, नमस्ते |” कहती हुई वह ट्रेन के डिब्बे में - [मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं...](https://humrang.com/main-jeevan-ki-bhavukta-ko-kahani-banati-hoon/) - पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति का घोषणापत्र बनाती हैं बल्कि स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को पूरी शिद्दत से सामने लाती हैं. वर्ष के अंत में आज ‘गीताश्री‘ के जन्मदिन पर हमरंग द्वारा बधाई स्वरूप….गीताश्री से उनकी रचनाशीलता को लेकर ‘सुशील - [एक छोटा-सा मजाक (कहानी)](https://humrang.com/ek-chhota-sa-mazak-kahani/) - मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है …… ऐसी ही एक कहानी …| – संपादक एक छोटा-सा मजाक Photo - Ayaan Madaar जल्दी ही नाद्या को इन शब्दों का नशा-सा - [चाँद के पार एक चाभी (कहानी)](https://humrang.com/chand-ke-par-ek-chabhi-lambi-kahani/) - ‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ विमर्श ही नहीं होता है बल्कि भूत, भविष्य के साथ-साथ वर्तमान का भी एक प्रतिरूप नज़र आता है. उन्होंने अपनी लंबी कहानी “चाँद के पार एक चाभी” में भी बदलते समय के साथ विकासोन्मुख ग्रामीण - [श्रृंखला (लंबी कहानी)](https://humrang.com/shrinkhala-lambi-kahani/) - चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण, निर्वासन उपन्यास के लेखक, हिंदी के यशस्वी कथाकार “अखिलेख” जी की आज पढ़िए हमरंग पर एक लंबी कहानी …..| – संपादक Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp श्रृंखला वह बढ़े हुए नाख़ूनों के सौष्‍ठव को निहारने लगी। उसके - [महाराज की बीमारी (व्यंग्य)- ब्रजेश कानूनगो](https://humrang.com/maharaj-ki-beemari-vyangy/) - चिकित्सा विज्ञान में प्रावीण्यता अर्जित किए और निपुण राजवैद्य बीमारी का सही कारण अपने सभी परीक्षणों के बावजूद पता नहीं लगा पा रहे थे। पड़ोसी राज्यों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया। मगर सफलता हाथ न लगी। दिनों दिन महाराज का चेहरा पीला पड़ता जा रहा था। पहले सी आभा और तेज विलुप्त था। - [चरित्रहीन (कहानी)](https://humrang.com/charitrheen-kahani-hanif-madaar/) - ‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप तो बाहर रहते हो इसलिए - [स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान (Namita Singh)](https://humrang.com/stri-andolan-itihas-aur-vatman/) - “योरोप में श्रमिक वर्ग के उदय और उनके संघर्ष एक ओर थे तो मध्यवर्ग की जागरुक स्त्रियों की बढ़ रही सक्रियता का परिणाम हुआ कि वहाँ समान अधिकारों के लिये संघर्ष की शुरूआत वोट के अधिकार के लिये हुई और उसके लिये प्रदर्शन आदि का सिलसिला भी शुरू हुआ।”………. ‘डा० नमिता सिंह‘ के द्वारा, स्त्री - [रश्मि सिंह की कविताएं---](https://humrang.com/rashmi-singh-ki-kavitayen/) - रश्मि सिंह की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता के उस सशक्त पक्ष को उजागर करती हैं जहाँ अनुभूति, वैचारिक प्रतिबद्धता और आत्मसंघर्ष एक सम्यक साहित्यिक संरचना में विन्यस्त होते हैं। इन कविताओं में कवयित्री का स्वर कहीं प्रतिज्ञात्मक है, कहीं आत्मालोचनात्मक, कहीं सामाजिक प्रश्नाकुलता से भरा हुआ, तो कहीं अस्तित्वबोध की सूक्ष्म दार्शनिकता में रूपांतरित होता - [खोया हुआ आदमी एवं अन्य कविताएं (कैलाश मनहर)](https://humrang.com/khoya-hua-admi-evam-any-kavitayen/) - कैलाश मनहर की कविताएँ—समकालीन जीवन की संवेदनहीनता, सामाजिक पाखंड और मानवीय अनुभवों की गहराई को बेहद सहज लेकिन तीखे ढंग से उजागर करती हैं। ये कविताएँ केवल घटनाओंका वर्णन नहीं करतीं, बल्कि हमारे समय की नैतिक स्थिति पर एक शांत, पर प्रभावशाली टिप्पणी प्रस्तुत करती हैं। भाषा सादगीपूर्ण है, लेकिन अर्थ-स्तर पर अत्यंत गहन। उनकी - [दूसरा पड़ाव -संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी](https://humrang.com/doosara-padaw-sangharsh-aur-ummeed/) - दूसरा पड़ाव – संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी है हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता तो उनमें डूब जाने को बेकल होने लगता। और सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा नहीं होता बल्कि उन आंखों को जो भी देखता होगा निश्चित ही उसका यही हाल होता होगा, यह बात मैं इतने - [इदिका राय - की कविताएं](https://humrang.com/idika-ray-ki-kavitayen/) - ‘इदिका राय’ की कविताएँ हमारे समय की सबसे बेचैन और ईमानदार अभिव्यक्तियों में से हैं। ये कविताएँ किसी अलंकारिक शिल्प के मोह में नहीं उलझतीं, बल्कि अनुभव की खुरदरी सच्चाइयों से अपना सौंदर्य रचती हैं। इनकी रचनाओं में अनुभव, प्रतिरोध और आत्मस्वीकृति सहज रूप में समाविष्ट होतीं है । इनमें भाषा के सौंदर्य का मोह - [दयामय की दया – लियो टॉल्स्टॉय की कहानियों में करुणा, मानवता और जीवन दर्शन](https://humrang.com/daya-may-ki-daya-lio-tolistoy/) - “दयामय की दया” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपी करुणा, नैतिकता और अंतःकरण की शक्ति का गहरा दर्पण है। लियो तोल्स्तोय की रचनाएँ सदैव मानव जीवन के सरल लेकिन अत्यंत गहन सत्य उजागर करती हैं। इस संकलन की पाँच कहानियाँ जीवन के नैतिक संघर्षों, दया, अहंकार, प्रेम और आत्मबोध जैसे भावों को - [प्रेम एवम् विद्रोह के बीच खड़े मनोहर श्याम जोशी, आलेख](https://humrang.com/prem-evam-vidroh-ke-beech-khade-manohar-shyam-joshi/) - सभ्यता के विकास के साथ ही प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां प्रचलित होने लगी थीं ! प्रेम और युद्ध मानव मन को आकर्षित करतें हैं यही कारण है की प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां आज भी लिखे जा रहें है और संभवतः सभ्यता के अंत तक लोगो का रुझान इस विषय - [आखिर क्या लिखूं ? | जब दिल भरा हो लेकिन शब्द न मिलें](https://humrang.com/akhir-kya-likhoon-jab-dil-bhara-ho/) - कितना तकलीफ़देह होता है उस स्वीकारोक्ति से खुद का साक्षात्कार, जहाँ आपको एहसास हो कि जिस चीज़ की प्राप्ति या तलाश में आप अपना पूरा जीवन और सम्पूर्ण व्यक्तित्व दाँव पर लगाए रहे, इस वक़्त में उसी चीज़ की अपनी सार्थकता ख़त्म हो रही है…| आखिर क्या लिखूं? | जब दिल भरा हो लेकिन शब्द - ["सीमा सिंह" की आवाज़ मे सुनिए 'हनीफ़ मदार' की कहानी "चरित्रहीन"](https://humrang.com/seema-singh-ki-awaz-main-charitrheen-kahani/) - ‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप तो बाहर रहते हो इसलिए - [पढ़ने-गुनने की जगह: कैसे वाचनालय और पुस्तकालय गढ़ते हैं व्यक्तित्व](https://humrang.com/padhne-gunane-ki-jagah-kaise-vachnalay/) - 1985 में चकमक से जुड़ाव ने किताबों और वाचनालयों के साथ एक नया रिश्ता बनाया। हर महीने पुस्तकालय में बिताए घंटों ने न सिर्फ पढ़ने-लिखने की आदत डाली, बल्कि व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव भी रखी। यह लेख बताता है कि कैसे वाचनालय और पुस्तकालय जीवन की दिशा बदल सकते हैं। पढ़ने-गुनने की जगह: कैसे - [विकासोन्मुख गाँव की जातिगत समस्या : ‘चाँद के पार एक चाभी’ का सामाजिक विश्लेषण](https://humrang.com/vikasonmukh-ganw-ki-jatigat-samsya/) - विकास की ओर बढ़ते भारतीय गाँवों में जातिगत भेदभाव अब भी एक गंभीर समस्या है। ‘चाँद के पार एक चाभी’ कहनी के माध्यम से ग्रामीण समाज की इस सच्चाई का गहन विश्लेषण। विकासोन्मुख गांव की जातिगत समस्या है : 'चाँद के पार एक चाभी' ‘अवधेश प्रीत की कहानी ‘चाँद के पार एक चाभी‘ को पढने के - [क्रांतिकारी की कथा : राजनीति और समाज का व्यंग्यात्मक सच](https://humrang.com/krantikari-ki-katha-rajneeti-aur-samaj/) - ‘क्रांतिकारी की कथा’ एक तीखा व्यंग्य है जो समाज, सत्ता और दिखावटी क्रांति की मानसिकता को उजागर करता है। यह लेख आज के दौर की सच्चाई को आईना दिखाता है। क्रांतिकारी की कथा अन्य व्यंग्य पढ़ें ‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था। खूब पढ़ा-लिखा युवक। स्वस्थ सुंदर। नौकरी भी अच्छी। विद्रोही। मार्क्स-लेनिन के उद्धरण देता, चे - [मैं भी आती हूँ: किसान, ज़मीन और विश्वासघात की मार्मिक कहानी](https://humrang.com/main-bhi-ati-hoon-kahani/) - एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े हरिया के साथ उसकी पत्नी क्या कुछ ऐसा करती है जिससे अचंभा हो जाता है – कहानी “मैं भी आती हूँ”। मैं भी आती हूं....! हरिया पेड़ के नीचे बैठा एकटक खेत में चलती जे०सी०बी० - [आओ कि सुंदर को सुंदरतम बना दें – प्रेम पर हिन्दी कविता](https://humrang.com/ao-ki-sunder-ko-sundertam-bana-den/) - “यह भावनात्मक हिंदी कविता प्रेम, सकारात्मक सोच और जीवन को बेहतर बनाने का संदेश देती है। पढ़ें और अपने दिल में उम्मीद की नई रोशनी जगाएं।” मानव जीवन की संवेदनाओं एवं कोमल भावों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देती पूरे आत्मविश्वास से भरी ‘नीलम स्वर्णकार’ की कुछ कविताएँ ……जैसे एक कोशिश घोर अँधेरे से उजाला खोज लाने - [मैं भी आती हूँ: कहानी सुनिए 'सीमा सिंह' की आवाज़ मेँ](https://humrang.com/main-bhi-aati-hoon-seema-singh-audio-kahani/) - एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े हरिया के साथ उसकी पत्नी क्या कुछ ऐसा करती है जिससे अचंभा हो जाता है – कहानी “मैं भी आती हूँ”। सुनिए कहानी “सीमा सिंह” की आवाज़ मेँ मैं भी आती हूं....! ऑडिओ नाम-सीमा सिंह - [अशोक तिवारी की लंबी कविताएँ: स्त्री जीवन के सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक आयामों का रचनात्मक विश्लेषण](https://humrang.com/ashok-tiwari-ki-lambi-kavitayen/) - अशोक तिवारी की लंबी कविताएँ स्त्री जीवन के क्षणिक और स्थायी अनुभवों, कुंठा, अवसाद और प्रेम के भावात्मक आरोह-अवरोह का सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक संदर्भों में संवेदनशील विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं। 1- वो औरत विस्मृत नहीं हो पातीघूंघट काढे़ वो औरतजो पशुओं की लीदअपने सिर पर ढोकरगांव बाहर घूरे तक जाती हैजिसके क़दम फिरघर की - [रमजान का रोज़ा और इंसान होने का सवाल: एक आत्मसंघर्ष की कहानी](https://humrang.com/ramzan-ka-roza-aur-insan-hone-ka-sawal/) - रमज़ान के रोज़े और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच उलझा एक मनुष्य—यह कहानी आत्मग्लानि, आडंबर और सच्ची इंसानियत के द्वंद्व को उजागर करती है। रोज़ा… Read More Storys पाक रमजान माह का दसवां रोजा था, मैंने रोजा नहीं रखा था। जबकि मैं जानता था कि दुनिया के हर मुसलमां को रोजा रखना फर्ज है। ऐसी धार्मिक - [दूसरा पड़ाव: जीवन के संघर्ष की Hindi Audio Story](https://humrang.com/doosara-padaw-hindi-audio-story/) - दूसरा पड़ाव’ एक मार्मिक हिंदी कहानी है जो जीवन के संघर्ष, अनुभव और नए मोड़ की कहानी कहती है। इस Hindi Audio Story में सुनिए इंसानी भावनाओं और जीवन के दूसरे पड़ाव की सच्चाई। सुनिए अन्य कहानियाँ Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp क्या आप गरीबी का नंगा सच और स्त्री जीवन का और गहरा सच जानना - [स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने ?](https://humrang.com/stri-atmnirbhar-kyon-bane/) - स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने? इस लेख में जानिए महिला आत्मनिर्भरता का महत्व, स्त्री सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बनने से जीवन में आने वाले बदलाव। मेरे पड़ोस में रहने वाली बीस वर्षीय सुमन को उसके पति की दिमागी हालत ठीक न होने की वजह से ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया है | वह - [चंद्रकांत देवताले की 'दुनिया का सबसे गरीब आदमी' एवं अन्य कविताएं](https://humrang.com/chandrakant-devtale-ki-kavitayen/) - चंद्रकांत देवताले की कविताएँ मनुष्यता, नैतिकता, संघर्ष और विरोधाभासी समाज के यथार्थ को गहराई से उजागर करती हैं। “दुनिया का सबसे गरीब आदमी एवं अन्य कविताएं” 1- दुनिया का सबसे गरीब आदमी दुनिया का सबसे गरीब आदमीदुनिया का सबसे गैब इनसानकौन होगासोच रहा हूँ उसकी माली हालत के बारे मेंनहीं! नहीं!! सोच नहींकल्पना कर रहा - 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[लेखक](https://humrang.com/लेखक/) - लेखक सूची खोजने के लिए लेखक सूची में लेखक के नाम को क्लिक करें हनीफ़ मदार All Post अनीता चौधरी All Post शेखर मलिक All Post सीमा आरिफ All Post निदा नबाज़ All Post राकेश तिवारी All Post रजनी गुप्त All Post नमिता सिंह All Post ब्रजेश कानूनगो All Post रूपाली सिन्हा All Post अशोक - [Videos](https://humrang.com/videos/) - "सीमा सिंह" की आवाज़ मे सुनिए 'हनीफ़ मदार' की कहानी "दूसरा पड़ाव" सुनें कहानी चरित्रहीन नाम-सीमा सिंह ●जन्मतिथि- 1961●शैक्षिक योग्यता- BA,BEd गोरखपुर विश्व विद्यालय। ●सम्प्रति- यूट्यूब पर पिछले की वर्षों से हिन्दी साहित्य के प्रत्येक पीढ़ी के रचनाकारों के कहानी, उपन्यासों का अक्षरश: पाठन। प्रतियोगी परीक्षार्थियों व विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराना, अब - [Disclaimer](https://humrang.com/disclaimer/) - Disclaimer – Humrang Last Updated: February 2026 The information provided on Humrang (https://humrang.com) is for general informational and creative purposes only. 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