हर वर्ष की भांति एक जनवरी २०१६ को कोवैलैंट ग्रुप ने अपना स्थापना दिवस अनूठे तथा रचनात्मक ढंग से उन युवा और किशोर प्रतिभाओं के साथ मनाया |जिनकी सामाजिक, साहित्यिक और कलात्मक प्रतिभाएं किसी मंच के अभाव में मुखर नहीं हो रहीं हैं | साथ ही ऐसे युवा और किशोर भी जो देश-दुनिया, समाज, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों और जिम्मेदारियों से दूर महज़ किताबी शिक्षा को ही मनोरंजन और जिन्दगी मान कर जी रहे हैं | ‘रमाशंकर विद्रोही‘ और ‘सफदर हाशमी‘ को समर्पित कार्यक्रम ‘हमारे समय में कविता‘ की एक रिपोर्ट ‘अन्तरिक्ष शर्मा‘ की कलम से …|
हमारे समय में कविता

अन्तरिक्ष शर्मा
1 जनवरी 2012 को कोवलेंट ग्रुप की स्थापना हुई थी। इसलिए हर वर्ष की 1 जनवरी कोवलेंट अपने स्थापना दिवस के रूप में मनाता है। कुछ युवा तथा किशोरों ने बच्चों के भीतर छुपी प्रतिभा को और निखारने हेतु मंच के अभाव के कारण और अपने में खोयी हुई, देश, विदेश, समाज, साहित्य, आर्ट, और समाज में अपनी जिम्मेदारियों से दूर, किताबी शिक्षा, मनोरंजन से भरी जिंदगी जी रहे युवा तथा किशोरों को एक मंच अथवा मार्गदर्शन प्रदान करने के विचार से इस ग्रुप का गठन किया। तो अपने चौथे स्थापना दिवस पर कल 1 जनवरी 2016 को एक बार फिर कोवलेंट ग्रुप ने हर बार की तरह नव वर्ष का आगमन एक नए ढंग से किया।
जी हाँ, कवि रमाशंकर विद्रोही जी को आज हमारे बीच कितने ही लोग नहीं जानते होंगे लेकिन कोवलेंट ग्रुप ने अपने स्थापना दिवस पर लोगों को उनके व्यक्तित्व, कविताओं और समाज में उनके योगदान को जानने की पहल की। कल कोवलेंट ग्रुप ने कवि ‘रमाशंकर विद्रोही’ और ‘सफदर हाशमी’ को समर्पित कार्यक्रम ‘हमारे समय में कविता’ का आयोजान हाइब्रिड सभागार में किया। सबसे पहले कार्यक्रम की शरुआत में कोवलेंट ग्रुप के उपाध्यक्ष अनिरुद्ध गुप्ता ने कोवलेंट ग्रुप का परिचय विस्तार से दिया और उसके तत्पश्चात संरक्षक अंतरिक्ष शर्मा ने कोवलेंट के विस्तृत इतहास और गतिविधियों से अवगत कराया और बताया कि कोवलेंट ने पिछले 4 वर्षों में जो कुछ भी किया वो सराहनीय इसलिए है क्योंकि कोवलेंट युवा तथा किशोरों का संगठन है, वो युवा जो तमाम अवरोधकों से घिरे हैं, जैसे- स्कूल, ट्यूशन, हर महीने परीक्षाएं, अभिभावकों की पाबन्दी आदि। जिन्हें कुछ रचनात्मक व साहित्यिक करने के लिए भी काफी सोचना पड़ जाये। तो ऐसी व्यवस्था में वो जितना कुछ भी कर पाएं हैं वो काबिल-ए-तारीफ़ है। 
उसके बाद रंगकर्मी एम. सनीफ मदार ने विद्रोही जी और सफ़दर हाशमी जी का संक्षिप्त परिचय दिया।
लगभग 2 घंटे के इस कार्यक्रम में कोवलेंट ग्रुप के कुछ साथी जैसे आशिका शिवांगी सिंह, देव सारस्वत, अंतरिक्ष शर्मा, किशन सिंह, कपिल कुमार, नीरज कुमार, अरबाज़ खान ने मात्र दो दिनों में कलीम जफ़र के संरक्षक में कविताओं को तैयार कर, उनका सचरित्र मंचन किया।
कविताओं के इस मंचन में ‘रमाशंकर विद्रोही’ की कविता ‘एक औरत की जली हुई लाश’ ,’औरतें’, और ‘नूर मियाँ’, ‘वीरेन डंगवाल’ की ‘मैं मारा गया’, ‘इतने भले न बनना साथी’ और ‘रामसिंह’, ‘मज़कूर आलम’ की ‘ये चुप्पी’, ‘जिजीविषा रजनी’ की ‘सदाशयता’, ‘देव सारस्वत’ की ‘अफज़ल काका’, ‘आशिका सिंह’ की ‘लाइट स्टैंड’, ‘पाश’ की ‘सबसे खतरनाक’ और ‘हम लड़ेंगे साथी’, ‘जोस दी दयागो’ की ‘मैं मारा गया’ आदि कविताएँ शामिल थीं।
मंचन के बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेखक व हमरंग.कॉम के संपादक ‘एम. हनीफ मदार’ ने रमाशंकर विद्रोही जी की कविताओं का सही मूल्यांकन कर लोगों को उनके व्यक्तित्व के बारे में परिचित कराया। और कहा कि “किसी भी शब्द को बोलने से पहले हमे उस हर शब्द का सही अर्थ पता होना चाहिए जो हम यहाँ बोलने जा रहे हैं तभी हम उसको पूरे हाव-भाव के साथ बोल सकते हैं, जो कि यहाँ मंचन में शामिल हर एक बच्चे ने किया”। और अंत में उन्होंने कुछ ग़ज़ल व कविताएं दर्शकों को पढ़ के सुनायीं जो भले ही लिखी गयी सालों साल पहले हों लेकिन आज भी वो व्यवस्था पर उतनी ही चोट और सत्य को उजागर करती हैं। जैसे ‘दुष्यंत कुमार’ की ग़ज़ल ‘साये में धूप’-
कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,
कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए।
तेरा निज़ाम है सिल दे ज़ुबान शायर की,
ये एहतियात ज़रुरी है इस बहर के लिए।
एवं अदम गोंडवी व नागार्जुन की कविता के साथ अपनी बातों को विराम दिया।
उसके बाद कवियत्री और हमरंग.कॉम की सहसंपादक ‘अनीता चौधरी’ ने अपनी दो कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कोवलेंट ग्रुप की अध्यक्ष आशिका सिंह ने दर्शकों का आभार प्रकट कर धन्यवाद यापन करके कार्यक्रम का समापन किया और इसी के साथ अंत में चाय की चुस्की के साथ कोवलेंट के साथी दीपक निषाद की कविता ‘इस्क्रा’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम का संचालन अभीप्सा शर्मा और आशिका सिंह ने किया।
कार्यक्रम में कलीम ज़फर, पुलकित फिलिप, अयान मदार, आशिया मदार, जफर अंसारी, नंदिनी, कृतांशु, अखिलेश, सोनवीर, दीपक, तनु, पूनम, एम0 सनीफ मदार, अनीता चौधरी, एम0 गनी आदि ने अपना योगदान रहा |