संकेत रंग टोली और कोवलेन्ट ग्रुप ने प्रेमचंद को उनके 135 वें जन्मदिवस पर लगभग ३ घंटे के कार्यक्रम में रचनात्मक तरीके से याद किया …..|

अनीता चौधरी
“प्रेमचंद से बातें”


मुंशी प्रेमचंद के 135 वें जन्मदिवस के अवसर पर हाइब्रिड पब्लिक स्कूल, मथुरा में ‘संकेत रंग टोली’ और ‘कोवेलेंट ग्रुप’ के तत्वाधान में “प्रेमचंद से बातें” नामक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी “शतरंग के खिलाड़ी” का मंचन किया गया और हाल ही में मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे कलीम ज़फर ने प्रेमचंद के प्रसिद् उपन्यास “गोदान” को गीत संगीत की सुरमयी रचनात्मकता और विशेष लय बद्धता के साथ कोवेलेंट के साथियों के द्वारा तैयार कराकर प्रस्तुत किया और सभी को रोमांचित कर दिया | इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हमरंग डॉट कॉम के सम्पादक व कहानीकार हनीफ मदार ने कहा कि आज प्रेमचंद के साहित्य का विभिन्न कला माध्यमों के साथ साहित्यिक पुनर्पाठ की महती आवश्यकता महसूस होने लगी है | जहां हम मौजूदा चुनौतियों के साथ तात्कालिक समय में मुठभेड़ करते पाते हैं जो बदले समय में भी हमारे आज का मूल्यांकन भी है |


कार्यक्रम की शुरुआत मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से की गई | कार्यक्रम को तीन चरणों में संपन्न किया गया | पहले चरण में शालिनी श्रीवास्तव के निर्देशन में कहानी “शतरंज के खिलाड़ी” का मंचन किया गया | नाटक में जहाँ एक तरफ पूरा देश आजादी के आन्दोलन में बढ-चढ़ कर अपनी भूमिका दर्ज करा रहा था वही दूसरी ओर सामन्ती स्वरूप में लिपटे मिर्जा और मीर रोशन अली नाम के व्यक्ति सारी चिंताओं को छोड़कर अपनी विलासता पूर्ण जिन्दगी को शतरंज खेलने में व्यतीत कर रहे थे | उन्हें आमजन के किसी भी दुःख- दर्द से सरोकार नहीं था | ठीक आज भी आजादी के लगभग 68 सालों बाद भी इन स्थितियों में कोई बदलाव नजर नहीं आता है | मंच पर नाटक के पात्रों को कलाकारों ने बहुत ही जीवन्तता के साथ खेला हैं | इसके चरित्रों के रूप में मंच पर आकाश, अरविन्द, अंजली, पूनम, गरिमा, अवतार, अनंत, दिव्यं, आदर्श, निशांत, आदि थे | कहानी को उद्घोषक के रूप में हर्षित कश्यप और वेश-भूषा और प्रोपटी विजयलक्ष्मी, तनु तथा प्रकाश परिकल्पना जफ़र अंसारी ने की |


कार्यक्रम के दूसरे चरण में कोवेलेंट ग्रुप व अन्य साथियों के साथ दुष्यंत कुमार, अदम गोंडवी और ब्रेख्त के जन गीत तथा छत्तीसगढ़ के कुछ लोक गीतों ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया | गायक कलाकारों में आयान, आर्यन, अन्तरिक्ष, कपिल, पुलकित, नीरज, विपिन, अभीप्सा, टीकम, देव, अनिरुद्ध, किशन, सोनवीर, अखलेश पुरी आदि थे | कार्यक्रम का तीसरा चरण ओर भी अनोखा रहा | प्रेमचंद के जीवन परिचय से लेकर सम्पूर्ण व्यक्तित्व और पूरे लेखनकर्म को बहुत ही मौलिकता के साथ कलीम ज़फर ने एक कहानी पाठ की तरह बारी- बारी से रचनात्मक क्रम में पढ़वा कर एक खूबसूरत परिचर्चा का रूप दिया | कार्यक्रम का संचालन एम सनीफ मदार द्वारा किया गया | इस कार्यक्रम के करीब करीब सत्तर लोग साक्षी बने | जिनमें बोबीना, एम गनी, सुमन श्रीवास्तव, निर्मला, नीरज, योगिता, गीता, अपर्णा पालीवाल, अर्चना, सपना, पुष्पेन्द्र, सद्दाम हुसैन, धर्मेन्द्र, मेघा, वन्दना, कविता, गुंजन,शालू , पूनम, जीतेंद्र, अजीत, अंगूरी रविन्द्र और संदीप आदि थे |