एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो0 यशपाल : अनीश अंकुर

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अनीश अंकुर 262 11/17/2018 12:00:00 AM

एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो0 यशपाल : अनीश अंकुर

श्रद्धांजलि सभा  आयोजन 

एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो यशपाल

” प्रोo यशपाल इस बात की चिंता करते थे कि भारत की जनता और विज्ञान को कैसे जोड़ा जाए और इस प्रक्रिया में ‘ भारत ज्ञान-विज्ञान समिति ‘ उभर कर आया। वे आये तो लाहौर से थे विभाजन के बाद लेकिन वे स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को लेकर चलते थे। वे एक एक्टीविस्ट की तरह काम करते थे।”
ये बातें ‘साइंस फॉर सोसायटी’ के प्रोo एस. पी.वर्मा ने प्रख्यात वैज्ञानिक व शिक्षाविद प्रो यशपाल ने श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए कहा।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भारतीय माध्यमिक शिक्षा संघ भवन में ‘अखिल भारतीय विश्विद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक संगठन’ , ‘केदार दास श्रम व समाज अध्ययन संस्थान’ तथा ‘ भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ’ द्वारा आयोजित किया गया था।
‘अखिल भारतीय विश्विद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अरुण कुमार ने अपने संबोधन में कहा ” कैसे साईंटिफिक टेंपर बच्चों में विकसित हो , उसकी चिंता प्रो यशपाल को रहती थी। विज्ञान कितना सहज है, उसे प्रोo यशपाल ने समझाया। एक अदना व्यक्ति स्पेस टेक्नोलॉजी को समझ सके ये प्रयास करते थे। वे हमेशा चाहते थे विदेशों पर निर्भर होने के बजाय स्वदेशी टेक्नोलॉजी को विकसित किया जाए। यशपाल द्वारा समर्थित रिपोर्ट ‘ चिल्ड्रेन विदाउट बर्डेन’ ये रिपोर्ट आज भी शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे”
साइंस कॉलेज में भैतिकी के प्रोफेसर शंकर मिश्रा ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा ” विज्ञान के गहन व गूढ़ विषयों के प्रति भी उनकी रुचि थी। विज्ञान को प्रयोगशाला के बजाय समाज में ले जाने की उन्होंने बात की। किताबों में तस्वीरों के माध्यम आए विज्ञान को कैसे पहुंचाया जाए ये भी उनकी चिंता का विषय था।”
प्राच्य प्रभा के संपादक विजय कुमार ने कहा” वे सवालों के जवाब देने से कभी भाग नही सकते। उनका महत्व देखना हो तो ‘राष्ट्रीय पाठ्यक्रम परिचर्चा’ को देख लीजिए। बच्चा समझ के बात करे। रटन्त विद्या से बच्चों को बचना चाहिए। वैज्ञानिक होने के साथ-साथ बड़े शिक्षाविद भी थे।”
शिक्षाविद अक्षय ने श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए कहा ” आज तथ्यों को कांट- छाँट कर विज्ञान की बात की जाती है। जन विज्ञान आंदोलन, साईंटिफिक टेंपर आदि सभी बातें एक लक्ष्य को केंद्रित थी।वे हर जगह बच्चों से बात करते थे। बच्चों के सोचने समझने की सृजनशील नैसर्गिक क्षमता कैसे जाग्रत किया जाए ये उनकी चिंता का विषय था ।”
मजदूर नेता अरुण मिश्रा के अनुसार ” गणेश जी को दूध पिलाने की घटना के माध्यम से अंधविश्वास फैलाने का प्रयास किया गया था। तब यशपाल ने टेलीविजन पर आकर इसके वैज्ञानिक कारण को बताया और समाज को अंधविश्वास के गर्त में डूबने से बचाया। आज इसरो के वैज्ञानिकों तक में वैज्ञानिक चेतना का अभाव है। अन्धविश्वास को व्यवस्थित तरीक़े से बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में उनकी कमी खलती रहेगी।”
विज्ञान शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार ने कहा ” यशपाल इंदिरा गांधी के वैज्ञानिक सलाहकार थे। साइंस को लोकप्रिय बनाने के लिए एक इमैजिनेशन था। छात्र व शिक्षक के बीच संवाद की बात उन्होंने की। अनसेर्टेंटी प्रिंसिपल को आज वैदिक सिद्धान्त बताने का व्यवस्थित प्रयास चला रहा है जो बेहद खतरनाक है। इसको रोकने के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा।”
‘प्रलेस’ के सुमन्त जी ने उन्हें बच्चों से घुलने -मिलने वाला दुर्लभ वैज्ञानिक बताते हुए कहा ” विज्ञान जनता के अर्जित अनुभवों आए तैयार होते हैं। वे प्रबंधक, प्रबोधक भी थे। घरेलु उदाहरणों से वे बच्चों को विज्ञान के बारे में बताया करते थे। कविता करते हुए विज्ञान तक पहुंचा जा सकता है। विज्ञान की रचना करते समय एक काव्य का अनुभव होता है। कविता व विज्ञान जिज्ञासा के दो अलग-अलग छोर है। वैसा उदाहरण दूसरा नही है।”
‘इसकफ़’के अशोक कुमार सिन्हा “आज समाज मे उत्तर सत्य को रचा जा रहा है। कार्य-कारण के संबंध को खत्म कर अविज्ञान को विज्ञान की बात की जगह लादने की कोशिश जी जा रही है।”
शिक्षक नेता भोला पासवान ने अपने संबोधन में कहा ” आज पूरी केंद्र सरकार अवैज्ञानिक लोगों के हाथों में है। ये बहुत चिंता की बात है।”
केदार दास श्रम व समाज अध्ययन संस्थान के अजय कुमार ने कहा ” आज देश मे दकियानूसी तत्वों को बढ़या जा रहा है। ऐसे तत्वों के विरुद्ध संघर्ष करने की आवश्यकता है।”
श्रद्धांजलि सभा में खासी संख्या में शिक्षक, रंगकर्मी, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता मौजूद थे। प्रमुख लोगों में सन्यासी रेड, जयप्रकाश, जावेद आलम , प्रो ए.बी गौतम और अशोक कुमार सिंह आदि मौजूद थे।
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा साइंस कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा ने किया।
अंत में एक मिनट का मौन रख कर प्रो यशपाल को श्रद्धांजलि दी गई।
धन्यवाद ज्ञापन अनीश अंकुर ने किया।

अनीश अंकुर द्वारा लिखित

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लेखक जानेमाने संस्कृतिकर्मी और स्वतन्त्र पत्रकार हैं।

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 पष्चिम लोहानीपुर

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