धन कभी काला होता है क्या ? व्यंग्य (नित्यानंद गायेन)

नित्यानंद गायेन 3 2018-11-17

धन कभी काला होता है क्या ? व्यंग्य (नित्यानंद गायेन)

धन कभी काला होता है क्या ? 

नित्यानंद गायेन

नित्यानंद गायेन

पिछले कई दिनों से मैं अपनी प्रेमिका से दूर होने के गम में एकदम देवदास बना हुआ था | ऊपर से ये बेईमान मौसम मुझे और भी उदास बना दे रहा है था | तो सोचा चलो आज संडे है  थोड़ा कहीं टहल आऊँ ताकि मन हल्का हो जाए | मैं विरह की पीड़ा से निकलने की सोच बारिश के बाद अपने कमरे से झलमल करती मुनिरका की गली में निकल पड़ा | अभी मैं गली में चल ही  रहा था कि देखा हरि भाई की दुकान पर टीवी आँन है  और एक समाचार चैनेल पर योगगुरु रामदेव याकूब मेमन की फांसी पर सलमान खान की ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कह रहे थे कि ऐसे ….फलां –फलां को …., बुद्धिजीवियों को ….करना चाहिए ….

मुझे बहुत हंसी आयी व्यापारी योग बाबा की बातें सुनकर ….मैंने अपने एक फन्ने खां  दोस्त को फोन किया …कि रामदेव का पेर्सोनेल नम्बर मुझे दें …पहले उसने यह कहते हुए मना किया कि यार वो तो स्वर्गीय राजीव दीक्षित के पास था ..वे  रहे नहीं  अब बाबा का पेर्सोनेल नम्बर केवल पी.एम. के पास है  और उनतक मेरी पहुँच नहीं | फिर मैंने उसे कहा कि देख तुझे मेरी  उसकी कसम ..तो सीधा लाइन पे आ गया और मुझे रामदेव का सीधा नम्बर दे दिया |

नम्बर मिलते ही मैंने फोन लगाया … ट्रिंग –ट्रिंग नहीं हुआ …एक कालर टोन सुनाई दिया – पौवा……. के आई …कुछ ऐसा ही था …खैर , अब काल रिसिब हुआ …आवाज आई ..पतंजली मेगा स्टोर में आपका स्वागत है | मैं हैरान तो नहीं था ..पर लगा शायद मेरे दोस्त ने रामदेव का नम्बर नहीं उनकी कम्पनी का नम्बर दे दिया है …फिर कुछ क्षण बाद फोन पर  आवाज़ आयी –‘ मत कहो काले धन की बात , हम मारेंगे पिछवाड़े पे लात’ | मैं फिर हैरान ! खैर अब  बाबा बोले हैल्लो …भारत माता की जय , गौ मूत्र , गोबर और गौ माता की जय ‘ ! कहिये मैं विश्व परसिध बाबा राम देव बोलता हूँ |

मैंने पूछा – पक्का आप रामदेव बोल रहे हैं ? तो आवाज़ आयी , यकीन न  हो तो इण्डिया टीवी के मालिक से साबित करवाऊं ?मैं सहज हो गया . कहा – नहीं , इसकी जरूरत नहीं  पड़ेगी , मैं आपकी आवाज पहचान गया हूँ ..आपकी नियत की तरह  बदलती रहती है |

बाबा एकदम गुस्सा गए मुझ पर और बोले – जियादा बोलोगे तो , तुम्हारा व्यापम हो  जायेगा समझे ?मैंने डरते हुए कहा – नहीं , बाबा  आप योग गुरु हैं , आसाराम बापू नहीं …आप ऐसा नहीं कर सकते मेरे साथ |तो बाबा बोले – देख भाई , तुझे याद होगा मैंने एकबार अभिज्ञान प्रकाश को साक्षात्कार देते हुए कहा था कि जब मैं सू –सू करने जाता हूँ , तो दो हजार लोग खड़े हो जाते हैं ….याद है  कि नहीं ?मैंने पूछ लिया – बाबा आप इतने सारे लोगों के सामने यह कार्य कर कैसे लेते हैं ? तो फोन पर ही भड़क उठे , बोले – देख तू  मेरी पापुलारटी के बारे में नहीं जानता एकदम कांग्रेस की तरह बात मत कर |मैंने कहा – जी , बाबा, पर यह तो बताइए कि काला धन कब आएगा ?अब बाबा थोड़े पोलाइट होके बोले- देखो मित्र, धन कभी काला होता है क्या ? धन तो लक्ष्मी का ही रूप है |मैंने कहा सही कह रहे हैं महाराज |जब नींद खुली तो देखा शाम 5:30  बज रहा था | दिन में आज भात ज्यादा खा लिए थे और फिर मुह में खैनी भी दबा लिए थे , पता नहीं कब आँख लग गयी थी |

नित्यानंद गायेन द्वारा लिखित

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परवाज़ : कहानी (अनीता चौधरी)

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अनीता 51 2018-12-10

जन्मदिन पर विशेष

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में परम्परावादी होने जैसा ही है | तीव्र से तीव्रतम होते संचार और सोसल माद्ध्यम के समय में वैचारिक प्रवाह और भूचाल से गुजरती कहानी भी खुद को बदल रही वह भी यदि गहरे प्रतीक और कला प्रतिबिम्बों के गोल-मोल भंवर में पाठक को न उलझाकर सीधे संवाद कर रही है वह सामाजिक ताने-बाने में पल-प्रतिपल घटित होती उन सूक्ष्म घटनाओं को सीधे उठाकर इंसानी वर्गीकरण और संवेदनाओं को तलाश रही है बल्कि खुद के वजूद के लिए संघर्ष के साथ उठ खड़ी हो रही है | कहानी का यह बदलता स्वरूप साहित्यिक मानदंड को भले ही असहज करे किन्तु वक़्त की दरकार तो यही है |

“हमरंग” की सह-संपादक 'अनीता चौधरी' की ऐसी ही एक कहानी......उनके जन्मदिवस पर बधाई के साथ | - संपादक

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