“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ)

सीमा आरिफ 4 2018-11-18

हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट   

सीमा आरिफ

मैं पिछले दो तीन वर्षों से विभिन्न समाचार पत्रों, मैगज़ीन में अलग अलग तरह के विषयों पर आर्टिकल-लेख लिख रही थी, काफ़ी वक़्त तक ब्लॉगर के तौर पर भी एक दो हिंदी समाचार पत्रों के ऑनलाइन संस्करण के लिए लिखा.

लेखन में गहरी दिलचस्पी कॉलेज के वक़्त से थी यदि किसी अख़बार के छोटे से कोने में एक “लेटर तो एडिटर” भी छप जाता था तो एक अजीब सी आत्मसंतुष्टि का भाव मन में गोते लगाने लगता था और आगे और बेहतर लिखने के लिए प्रेरणा मिलती थी.

पिछले कुछ समय से मेरी कलम के मूड ने एक नया रास्ता पकड़ा है और वो रास्ता है कविताओं के माध्यम से अपनी भावनाओं, ख़्यालों का इज़हार करने का,  तो सोशल मीडिया आप को अभिव्यक्ति की फुल आज़ादी देने के साथ साथ ढेर सारे फ्रेंड्स-फोल्लोवेर्स और एक पहचान भी देता है, लेकिन किसी भी लेखक के लिए सबसे ज़्यादा ख़ुशी का पल होता है जब किसी अच्छी वेबसाइट, पेज, एवं अन्य ऑनलाइन साइट्स पर उसका लेख, रचना प्रकाशित हो, उसके लिए यह पल “Wow-ohh my God” जैसा होता है.

सो हमरंग.कॉम पर प्रथम बार मेरी कविता का प्रकाशित होना मेरे लिए बेहद ख़ुशी वाला लम्हा  था, उससे जुड़ा वाकया भी बड़ा दिलचस्प है, हुआ यूँ कि किसी एक फेसबुक दोस्त ने बातों बातों में ही ज़िक्र करते हुए बताया कि आपकी एक वेबसाइट पर फलां-फलां कविताएँ पढ़ी, बहुत अच्छा लिखा है आपने, मेरे लिए उस दोस्त से यह सवाल करना कि कब, कहाँ छपी ? थोड़ा सा अटपटा होता, सो मैंने खुद ही ढूँढना शुरू किया, जब देखा कि हमरंग.कॉम पर मेरी रचनाओं को जगह मिली तो, यकीन मानिए मैं उस समय ख़ुशी से झूम उठी, इस वेबसाइट पर लिखने के बाद तो फेसबुक पेज पर फ्रेंड रिक्वेस्ट की जैसे बाड़ सी आ गई, लोगों ने मेरी कविताओं को काफ़ी सराहा फ़िर क्या था मुझे भी और बेहतर, अच्छा लिखने का जोश मिलने लगा, मेरी कविता लिखने की कला में थोड़ी और गहराई-अर्थ पैदा होने लगे | पहले से और परिपक्वता आयी | उसके बाद कई बार हमरंग.कॉम ने मेरी रचनाओं को अपनी वेबसाइट पर जगह दी, जिसके लिए मैं हमरंग की पूरी टीम को अपने इस लेख के माध्यम से शुक्रिया कहना चाहूंगी |

हमरंग.कॉम की जो बात मुझे सबसे ज़्यादा अपनी ओर खींचती है वो है कि यहाँ पर आप को साहित्य-कला से सम्बंधित बेहद उम्दा और अच्छा पढ़ने को मिलता है | मेरे कहने का अर्थ यह नहीं है कि साहित्य-कला में अच्छे-बुरे जैसा कोई मापदंड भी है पर इन्टरनेट क्रांति के आने के उपरांत सोशल मीडिया, विभिन्न वेबसाइट पर हर तरह का साहित्य आप के सामने परोसा जा रहा है |

मैंने नोटिस किया कि हमरंग.कॉम हमेशा ही ज्ञानवर्धक, सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेख, कविताएँ, ड्रामे, समीक्षाएं, साक्षात्कार, ग़ज़लें, लघु कहानियां आदि आदि पढ़ने का अवसर पाठकों को प्रदान करता है | यह पाठक पर भी उतना ही निर्भर करता है कि वो कौन से टाइप के लेखन को पढ़ कर आगे बढ़ना चाहता है |

खैर तो, हमरंग.कॉम के संपादक हनीफ़ मदार और अनीता चौधरी जी से फेसबुक पर ही कभी कभी काम से सम्बंधित बातें होती थी | बातों का सिलसिला आगे बढ़ा तो मैंने एक दिन सम्पादक हनीफ़ मदार जी से मज़ाक़-मज़ाक़ में मथुरा आने की इच्छा ज़ाहिर की, जिस पर उन्होंने सहर्ष मुहर लगाते हुए मथुरा आने का न्योता दे दिया | मैं इससे पहले कई वर्ष पूर्व एक बार कॉलेज की तरफ़ से मथुरा जा चुकी थी और मथुरा को लेकर हम लोगों ने एक इमेज सेट की हुई थी जिसका ज़िक्र मौक़ा मिला तो फ़िर कभी करुँगी | हाँ, लेकिन यह भी इल्म नहीं था कि कब जाना होगा, बस मन में था कि हाँ कभी मौक़ा मिला तो एक दफ़ा हमरंग.कॉम की टीम से ज़रूर मिलूंगी |

अगर आपका इरादा पक्का हो तो हर चीज़ मुमकिन हो जाती है | इतेफाक़ से, मेरा अगले ही माह मथुरा जाना हुआ | मैं हनीफ़ जी, अनीता जी तथा अन्य साथियों से मिली | मुझे एक लम्हे को भी यह एहसास नहीं हुआ कि मैं इन सब लोगों से पहली बार मिल रही हूँ, या यूँ कहें कि ऐसा लगा जैसे मैं रोज़ ही हमरंग के इस छोटे से, पर बेहद खुशनुमा दफ़्तर में आकर बतियाती हूँ | घंटों यहाँ पर होने वाली गतिविधियों, संगोष्ठियों में हिस्सा लेती हूँ |

हमरंग.कॉम का दफ़्तर, अपने लफ़्ज़ों में कहूँ तो किसी भी प्रकार की शोबाज़ी से कोसों दूर बेहद सादा और नार्मल था | हम दिल्ली वालों के लिए ऑफिस का अर्थ एक प्रॉपर सेटअप के साथ साझी-धजी बड़ी सी बिल्डिंग, ऑफिस होती है पर यहाँ आकार देखा और समझा कि अगर इन्सान में कुछ करने की लगन और दिलचस्पी हो तो उसके लिए किसी तामझाम की कोई ज़रुरत नहीं है | बस काम को करने के लिए दिल में जज़्बा और नेक नियत होनी चाहिए.

हनीफ़ मदार जी के मन में कला-साहित्य-रंगमंच को लेकर एक ख़ास कोना है जिसे वो अपने इस प्रयास के ज़रिए हमेशा कायम रख सकें ऐसी मेरी कामना है.

हमरंग के संपादकों का यह प्रयास रहता है कि ज़्यादा से ज़्यादा नव-लेखकों, युवा रचनाकारों को इस प्लेटफार्म पे अपनी बात कहने, अपने भावों को अभिव्यक्त करने का मौक़ा मिले, बशर्त कि उनकी रचनाएँ, लेख भेड़-चाल की दौड़ से परे हों, उनकी रचनाएं किसी जल्दी में न लिखी गयी हों, उसमें कुछ अलग बात हो कुछ ऐसा हो जिसमें समाज के यथार्थ की झलक निकलकर आए.

साहित्य-कला, रंगमंच को लेकर हमरंग.कॉम की टीम का जो एक साफ़ नज़रिया और निश्छल प्रेम का भाव है उसे देखकर सुखद एहसास होता है, यह एक सकारात्मक संकेत है कि साहित्य ख़ासकर हिंदी साहित्य के सुस्त पड़ चुके क़दम और मध्यम गति से साँस लेती धडकनें कुछ चुनिंदा ही सही व्यक्तियों के हाथों में तो हैं.

उम्मीद के साथ साथ दुआ करती हूँ कि हमरंग.कॉम की टीम द्वारा जो सार्थक कदम उठाया गया है वो आगे भी ऐसे ही कामयाबी के साथ बढ़ता जाए ताकि हिंदी भाषा से जुड़े हर शख्स को उम्दा साहित्य-कला रंगमंच पढने-देखने का मौक़ा बदस्तूर मिलता रहे….

सीमा आरिफ द्वारा लिखित

सीमा आरिफ बायोग्राफी !

नाम : सीमा आरिफ
निक नाम :
ईमेल आईडी :
फॉलो करे :
ऑथर के बारे में :

अपनी टिप्पणी पोस्ट करें -

एडमिन द्वारा पुस्टि करने बाद ही कमेंट को पब्लिश किया जायेगा !

पोस्ट की गई टिप्पणी -

हाल ही में प्रकाशित

परवाज़ : कहानी (अनीता चौधरी)

परवाज़ : कहानी (अनीता चौधरी)

अनीता 52 2018-12-10

जन्मदिन पर विशेष

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में परम्परावादी होने जैसा ही है | तीव्र से तीव्रतम होते संचार और सोसल माद्ध्यम के समय में वैचारिक प्रवाह और भूचाल से गुजरती कहानी भी खुद को बदल रही वह भी यदि गहरे प्रतीक और कला प्रतिबिम्बों के गोल-मोल भंवर में पाठक को न उलझाकर सीधे संवाद कर रही है वह सामाजिक ताने-बाने में पल-प्रतिपल घटित होती उन सूक्ष्म घटनाओं को सीधे उठाकर इंसानी वर्गीकरण और संवेदनाओं को तलाश रही है बल्कि खुद के वजूद के लिए संघर्ष के साथ उठ खड़ी हो रही है | कहानी का यह बदलता स्वरूप साहित्यिक मानदंड को भले ही असहज करे किन्तु वक़्त की दरकार तो यही है |

“हमरंग” की सह-संपादक 'अनीता चौधरी' की ऐसी ही एक कहानी......उनके जन्मदिवस पर बधाई के साथ | - संपादक

नोट-

हमरंग पूर्णतः अव्यावसायिक एवं अवैतनिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक साझा प्रयास है | हमरंग पर प्रकाशित किसी भी रचना, लेख-आलेख में प्रयुक्त भाव व् विचार लेखक के खुद के विचार हैं, उन भाव या विचारों से हमरंग या हमरंग टीम का सहमत होना अनिवार्य नहीं है । हमरंग जन-सहयोग से संचालित साझा प्रयास है, अतः आप रचनात्मक सहयोग, और आर्थिक सहयोग कर हमरंग को प्राणवायु दे सकते हैं | आर्थिक सहयोग करें -
Humrang
A/c- 158505000774
IFSC: - ICIC0001585

सम्पर्क सूत्र

हमरंग डॉट कॉम - ISSN-NO. - 2455-2011
संपादक - हनीफ़ मदार । सह-संपादक - अनीता चौधरी
हाइब्रिड पब्लिक स्कूल, तैयबपुर रोड,
निकट - ढहरुआ रेलवे क्रासिंग यमुनापार,
मथुरा, उत्तर प्रदेश , इंडिया 281001
info@humrang.com
07417177177 , 07417661666
http://www.humrang.com/
Follow on
Copyright © 2014 - 2018 All rights reserved.