जश्न-ए-रेख्ता 2016: रिपोर्ट (सीमा आरिफ)

रंगमंच साहित्यक गतिविधिया

सीमा आरिफ 30 2018-11-18

जश्न-ए-रेख्ता जलसे का आयोजन पिछले दो सालों से दिल्ली में किया जा रहा है.इस बार इस कार्यक्रम का आयोजन 12-14 फरवरी २०१६ को इंदिरा गांधी राष्टीय कला केंद्र दिल्ली में किया गया. कार्यक्रम की एक संक्षिप्त रिपोर्ट ‘सीमा आरिफ‘ के द्वारा ……|

जश्न-ए-रेख्ता 2016  

सीमा आरिफ

लगभग दो साल पहले रेख्ता फाउंडेशन की स्थापना आईआईटीयन श्री संजीव सराफ़ ने उर्दू से अपने निजी लगाव को आगे बढाते हुए की थी, उनको इस मीठी ज़बान से बचपन से गहरा लगाव था।
जो आज हम सब के सामने एक सफल ग़ज़ल शेर नज्म से सम्बन्धित उर्दू वेबसाइट के रूप मेें मौजूद है।
Rekhta.org वेबसाइट के पीछे उनका मकसद था कि उर्दू जुबां जिसको एक मज़हब, तबके से जुड़े लोगो की ज़बान का नाम दे कर हाशिये पर धकेल दिया गया है जो ज़बान सियासी तौर पर सबसे ज़्यादा नज़रंदाज़ की गयी है, वो फिर से नए रंग रूप के साथ उसके चाहने वालो तक पहुँचे.

रेख्ता वेबसाइट पर उर्दू ग़ज़ल शायरी को पसंद करने वाले लोगो को उर्दू शायरी हिंदी, उर्दू, रोमन तीन भाषाओँ में उपलध कराई गयी है. हर मुश्किल शब्द का अर्थ, मायने शब्द पर क्लिक करने पर आसानी से खोजे जा सकते है, ग़ज़ल,मुशायरों से संबधित उनकी वीडियो, ईबुक्स भी वेबसाइट पर आसानी से मौजूद है.

जश्न-ए-रेख्ता जलसे का आयोजन पिछले दो सालों से दिल्ली में किया जा रहा है.इस बारी इस कार्यक्रम का आयोजन 12-14 फरवरी २०१६ को इंदिरा गांधी राष्टीय कला केंद्र दिल्ली में किया गया.

तीन दिवसीय इस प्रोग्राम में लगभग 75 जानी मानी हस्तियों ने अपनी शिरकत दी.
उर्दू-हिंदी के शायर, प्रोफ़ेसर, स्कॉलर, फनकारों ने हिस्सा लिया इसमें पाकिस्तान से आए कलाकार, नाटककार भी शामिल रहे.पहले दिन का आगाज़ ” कैफ़ी और मैं ” नाटक से शुरू हुआ,जाने मानी अभिनेत्री, और कैफ़ी आज़मी की बेटी शबाना आज़मी और मशहूर शायर-गीतकार जावेद अख्तर ने इस में शिरकत की. वही दूसरी तरफ बच्चों के लिए एक अलग कोना,गुलज़ार साहिब का उर्दू को लेकर इश्क़ मौसम की रंगत को सराबोर किये हुआ था.अगले दिन एम्-सईद आलम दुवारा निर्देशित ‘ ग़ालिब के खत’ नाटक को अभिनेता,थिएटर पर्सनालिटी टॉम आल्टर ने अपने अभिनय से समा बंधे रखा,इस नाटक में जनता इतनी तादाद में मौजूद थी कि क्या कहने. तीसरे यानी आखिरी दिन एम् एस सत्यू के निर्देशन में “दारा शिकोह” नाटक आदि का सफल मंचन हुआ.

राजधानी दिल्ली में कला, संगीत को लेकर दीवानी किस हद तक है, इस बात का गवाह यह जलसा रहा. लाखो की संख्या में लोगो वहां पहुँचे. दीवाने-आम, दीवाने-ए-ख़ास, बज्म-ए-रवां और कुज्ज़-ए-सुखन नाम से थिएटर बनाए गये. उर्दू को समर्पित यह तीन दिनों में ग़ालिब,मीर तकी मीर,कैफ़ी आज़मी,अल्लमा इकबाल,आदि की शायरी का जादू जनपथ इण्डिया गेट की फिज़ा को महका रहा था. वही दूसरी तरफ बच्चों के लिए एक अलग कोना, गुलज़ार साहिब का उर्दू को लेकर इश्क़ मौसम की रंगत को सराबोर किये हुआ था.
तीन दिन चले इस कार्यक्रम में शाम को शतरंज के खिलाड़ी,मुगले आज़म फिल्मों की स्क्रीनिंग की गयी, और उर्दू बाज़ार, कैलीग्राफी कोर्नर, बुक्स कोर्नर मुशायरा, दास्तानगोई, ड्रामा,डांस, ग़ज़ल से दिल्ली की सर्द रातों का ताज़ा किया गया.

सीमा आरिफ द्वारा लिखित

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इसके अलावा निकष’, ‘डार से बिछुड़ी’, मित्रों मरजानी’, ‘यारों के यार’, ‘तिन-पहाड़’, ‘बादलों के घेरे’, ‘सूरज मुखी अँधेरे के’, ‘ज़िन्दगीनामा’, ‘ लड़की’, ‘दिलो-दानिश’, ‘हम हशमतऔर समय सरगमसे गुज़री आपकी लम्बी साहित्यिक ज़िंदगी में अपनी हर नई रचना में आपने ख़ुद अपनी क्षमताओं का अतिक्रमण किया जो सामाजिक और नैतिक बहसों की अनुगूँज के रूप में बौद्धिक उत्तेजना, आलोचनात्मक विमर्श, के साथ पाठकों में बराबर बनी रही

 

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