बिस्मिल्लाह खाँ चोरी हो गए।

अनुपम 67 2018-11-24

सुविख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ पर आधारित कविता।

बिस्मिल्लाह खाँ चोरी हो गए  

गंगा घाट किनारे 

बालाजी और मंगला गौरी मंदिर की घंटियाँ

अचानक बहुत तेज बजने लगीं

इतना शोर होने लगा कि गंगा की मछलियाँ

पानी में उछल उछल बाहर को झाँकने लगीं हैं

कोयल ने नीम का हाथ कस कर पकड़ लिया है

गायों ने पूरे बनारस के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ दिया है।

कत्था पान के ऊपर लगने से

और कचौड़ियों ने फूलने से मना कर दिया है।

एक बच्चा 

जो नदी में फेंके गए सिक्कों को लाने के लिए गंगा में कूदा था- 

बाहर नहीं निकल रहा है।

हुआ यह है

कि कई सालों पहले

बनारस अपने घाटों और मंदिरों को लेकर

जिस शहनाई में जा बसा था

वह अचानक चोरी हो गयी है।


उसकी तलाश में चींटियों ने सारा शहर छान मारा

कठफोड़वों ने सारे पेड़

और बंदरों ने मंदिरों को।


लेकिन न बनारस दिखता है

न शहनाई

न बिस्मिल्लाह का पुस्तैनी घर

ऐसा लगता है कि किसी ने पान खाकर इस शहर पर थूक दिया हो।


बहरहाल, आज की ताज़ा खबर यह है कि

न शहनाई चोरी हुई है

न शहर कहीं गया है

बस खाँ साहब चोरी हो गए हैं।




अनुपम द्वारा लिखित

अनुपम बायोग्राफी !

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