आदिवासियत को महसूस कराती जंगली कहानी

सिनेमा फिल्म-समीक्षा

तेजस पूनिया 219 2018-12-09

हाल फिलहाल की 2018 की ‘रेस 3’ , ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान’ से धोखा खा चुके लोगों के दिलों पर मरहम लगाने के लिए यह फिल्म एक अच्छी औषधि साबित हो सकती है । फिल्म के एक्शन दृश्य दिल दहलाने वाले हैं ।


 

इस जंगल की निगाहों में देखी हर शुरुआत है मैंने । देखा हर अंजाम । कहाँ है मेरा नाम । एक दिन इंसान जंगल में आया और जंगल ने अपनी रक्षा को हर शहर को उससे लड़ाया । अंधेरा छाया, जंगल में फिर चीखें गूंजी । बाघ की काया, नाम शेर खान । तोड़ दिया जंगल का पुराना कानून , उसने इंसान की लेकर जान । फिर उस रात हुई एक अजीब बात, एक अनजान जानवर के नन्हे अपने हाथों में सौंप दिया अपना भविष्य जंगल ने । उस पल की गवाह हूँ मैं , इस जंगल की निगाहों में ।

फिल्म की शुरुआत में नेपथ्य से आती आवाज आपको जंगल की इस भय मिश्रित पारलौकिकता के दर्शन कराती है । यह फिल्म और इस फिल्म की कहानी किसी भी पढ़ने वाले मनुष्य से अछूती नहीं रही है । ‘द जंगल बुक’ के नाम से विश्व प्रसिद्ध इस आदिवासी कहानी के लेखक हैं रुडयार्ड किपलिंग । नोबल पुरूस्कार विजेता किपलिंग भारत में जन्मे थे और बचपन के 6 साल भारत में रहने के बाद वे 10 सालों के लिए इंग्लैण्ड चले गए  और पुन: भारत लौटे । किपलिंग की इस कहानी को कई बार आप और हम टीवी पर देख चुके हैं । लेकिन सम्भवत: पहली बार जो आनंद नेटफ्लिक्स की फिल्म मोगली को देखकर आया वैसा कभी नहीं आएगा ।

मोगली की कहानी के बारे में आप में से किसी को बताने की आवश्यकता नहीं । तो सीधा फिल्म पर बात करते हैं । फिल्म में शेर खान का चापलूस भी है जो कि लकड़बग्घा है वह आपका दमदार मनोरंजन करता है । उसके अलावा  एक भेड़िया जोड़ा है जो उस इंसान के बच्चे को अपना बच्चा समझकर रक्षा करता है और उसे ट्रेनिंग देता है । इंसान के पिल्लै का कुछ जानवर विरोध भी करते हैं और उसका पक्ष नहीं लेते । शेर खान उस बच्चे के इंसानी माँ-बाप को मार डालता है । उसकी दाढ़ में लगा इंसानी खून उस बच्चे के खून से भी अपनी दाढ़ को भिगोना चाहता है ।

शिकार एक तपस्या है और जानवरों का हक़ भी । और इस हक़ पर कुछ मांसाहारी लोग अपना कब्जा जमा चुकी है । फिल्म के एक एक डायलॉग किपलिंग की कहानी के हैं इसलिए आप उनसे बंधते जाते हैं । जंगल मनुष्य के जन्म से पूर्व से थे किन्तु जिस तरह हम प्रकृति का दिनों-दिन शोषण करते आ रहे हैं उस हिसाब से लगता नहीं की ये मनुष्य के पश्चात् है । वह बच्चा इंसान का है किन्तु जैसे जैसे बड़ा होता है वह अपने आप को भी भेड़िया समझने लगता  है । इंसान होने के नाते उसके अंर्तमन में एक जिज्ञासु मनुष्य भी है । इसलिए वह अपने जानवर गुरुओं से सवाल जवाब भी करता है । मोगली जंगल को अपना परिवार समझता है और मादा भेड़िया तथा मोगली के संवाद आपके भीतर के इंसान और उसकी ममता को भरपूर झिंझोड़ने का प्रयास करते हैं । मोगली की भी दिली ख्वाहिश है कि वह भेड़िये के रूप में पैदा हो लेकिन इंसान होकर भी वह जंगल में रहने के कारण भेड़िया बनता है जिसे जंगल की परवाह है ।  

कोई भेड़िया इंसान के पास नहीं जाएगा , इंसान के पालतू पशुओं का शिकार मना है, ख़ास करके गाय का जो सबकी माता है । कोई भेड़िया इंसान को जंगल में नहीं मारेगा क्योंकि इंसान का मरना आफत लाता है । यह आफत जंगल और जानवरों पर बराबर रूप से पड़ती है ।  इंसान के पूर्वज बंदर माने जाते हैं इसलिए मोगली को बंदर का साथ आकर्षित करता है चूँकि उसे भेड़ियों की जमात ने पाला है इसलिए वे उसे एक बंधन में रखना चाहते हैं ।

फिल्म की कहानी पढ़ने में जितनी रोचक है उतनी ही इसे अपने गैजेट्स और मोबाइल में देखते हुए भी रोचक लगती है । इंसान बदल रहा है और वह जंगल को भी हर बदलते मौसम के साथ छोटा करता जा रहा है । जंगलों के प्रति यह फिल्म भरपूर संवेदना हमारे और सहृदयों के भीतर जगाने में कामयाब होगी । भेड़िये उसे इंसान के पास भेजना नहीं चाहते इसलिए वे एक दौड़ का आयोजन भी करते हैं और मोगली को भरपूर ट्रेनिंग भी जानवरों द्वारा दी जाती है । मोगली एक समय के बाद अपने आप को भेड़ियों की संतान ही समझने लगता है लेकिन उसके भीतर का इंसान जंगल के पास बसे गाँव से भी अछूता नहीं रह पाता इसलिए वह उन्हें छिपकर देखता रहता है । इंसानी जात ने जानवरों पर बहुत अत्याचार किए हैं उनकी की बानगी है यह फिल्म और इस फिल्म की कहानी ।   

फिल्म का निर्देशन बेहद कसा हुआ तथा इस क्षेत्र में की गई  काफ़ी मेहनत साफ़ नजर आती है । मोगली : लिजेंड ऑफ़ द जंगल में जिन कलाकारों ने अपनी आवाज दी हैं उनमें भालू की आवाज देने वाले हैं एंडी सेर्किस (Endy Serkis) शेर खान के रूप में बेनेडिक्ट कम्बेरबैच ( Benedict Cumberbatch) की आवाज प्रभावित करती है । तो बघीरा की आवाज में  क्रिस्चियन बाले (Christian Bale) निराश करते हैं । बाकि अन्य कलाकारों की आवाज का भी भरपूर सहयोग फिल्म में देखने को मिलता है ।  हाल फिलहाल की 2018 की ‘रेस 3’ , ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान’ से धोखा खा चुके लोगों के दिलों पर मरहम लगाने के लिए यह फिल्म एक अच्छी औषधि साबित हो सकती है ।  फिल्म के एक्शन दृश्य दिल दहलाने वाले हैं । इसलिए एक्शन प्रेमियों के लिए भी यह अच्छे , चमकीले रैपर में लिपटी चॉकलेट साबित होगी । फिल्म को देखते हुए आपकी तसमे कसती हैं और आप इसकी वजह से भयभीत और रोमांचित भी होते हैं । 

तेजस पूनिया द्वारा लिखित

तेजस पूनिया बायोग्राफी !

नाम : तेजस पूनिया
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ऑथर के बारे में : Tejas Poonia S/o Raghunath Poonia 
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इसके अलावा निकष’, ‘डार से बिछुड़ी’, मित्रों मरजानी’, ‘यारों के यार’, ‘तिन-पहाड़’, ‘बादलों के घेरे’, ‘सूरज मुखी अँधेरे के’, ‘ज़िन्दगीनामा’, ‘ लड़की’, ‘दिलो-दानिश’, ‘हम हशमतऔर समय सरगमसे गुज़री आपकी लम्बी साहित्यिक ज़िंदगी में अपनी हर नई रचना में आपने ख़ुद अपनी क्षमताओं का अतिक्रमण किया जो सामाजिक और नैतिक बहसों की अनुगूँज के रूप में बौद्धिक उत्तेजना, आलोचनात्मक विमर्श, के साथ पाठकों में बराबर बनी रही

 

साहित्य अकादमी पुरस्कार और उसकी महत्तर सदस्यता के अतिरिक्त, अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों और अलंकरणों से शोभित कृष्णा सोबती साहित्य की समग्रता में ख़ुद के असाधारण व्यक्तित्व को भी साधारणता की मर्यादा में एक छोटी-सी कलम का पर्याय ही मानती रहीं बावज़ूद आपने हिन्दी की कथा-भाषा को एक विलक्षण ताज़गी दी आज अपने बीच से उनका चले जाना भले ही एक जीवन चक्र का पूरा होना हो किंतु यह सम्पूर्ण हिंदी साहित्य जगत के लिए एक ऐसी अपूर्णीय रिक्तता की तरह है  जिसे भर पाना नामुमकिन है

 

उन्हीं की एक कहानी के साथ हमरंगपरिवार कृष्णा सोबती को नमन करता है

नोट-

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