नए साल २०२१ का आग़ाज़ : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और इरशाद खान सिकंदर की रचनाओं से

कविता ग़ज़ल

हनीफ मदार 420 1/1/2021 12:00:00 AM

उम्मीद एक शब्द है जिए जाने का,

वरना बीते साल ने कहाँ का छोड़ा है।

इसी उम्मीद के सहारे नए सपनों, आशाओं, प्रेम और इंसानियत से भारी दुनिया सजाने की उम्मीद के साथ आइए फिर से करते हैं इस नए वर्ष २०२१ का स्वागत॰॰॰॰॰॰

नए साल २०२१ का आग़ाज़ 

नये साल में (नज़्म)

कई चाँद अपनी चमक खो चुके

कई शम्स बुझकर धुआँ हो चुके

सितारे ज़मीं पर गिरे टूटकर

शबो-रोज़ रोया फ़लक फूटकर

बहुत कुछ गया है गये साल में 

ख़ुदा जाने क्या हो नये साल में

 

मुहब्बत का मौसम हुआ बरतरफ़

मची मज़हबी हाव-हू हर तरफ़

हवा वो कि साँसें उखड़ने लगीं

नयी बस्तियाँ भी उजड़ने लगीं

सियासत की जानिब से फ़रमान है

उसे क़ैद कर लो जो इंसान है

उठा लाये माज़ी को सब हाल में

हुआ ख़ौफ़ रक़्साँ खुले बाल में

 

है राहत कुछ आँखें भरी अब भी हैं

उमीदों की शाख़ें हरी अब भी हैं

सदा इक्का-दुक्का सही आयी तो

कि ज़िन्दाँ में कुछ रौशनी आयी तो

निराशा में आशा जगाते हुए

दिखे फूल कुछ मुस्कुराते हुए

वो डिम्पल से पड़ते हुए गाल में 

बँधाते हैं हिम्मत नये साल में

- इरशाद ख़ान सिकन्दर


नए साल की शुभकामनाएँ!

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को

कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को

नए साल की शुभकामनाएं! 

 

जाँते के गीतों को बैलों की चाल को

करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को

नए साल की शुभकामनाएँ!

 

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को

चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को

नए साल की शुभकामनाएँ!

 

वीराने जंगल को तारों को रात को

ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को

नए साल की शुभकामनाएँ!

 

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को

सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को

नए साल की शुभकामनाएँ!

 

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को

हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को

नए साल की शुभकामनाएँ!

 

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे

उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे

नए साल की शुभकामनाएँ!

- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

(चित्र google से साभार)

हनीफ मदार द्वारा लिखित

हनीफ मदार बायोग्राफी !

नाम : हनीफ मदार
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ऑथर के बारे में :

जन्म -  1 मार्च १९७२ को उत्तर प्रदेश के 'एटा' जिले के एक छोटे गावं 'डोर्रा' में 

- 'सहारा समय' के लिए निरंतर तीन वर्ष विश्लेष्णात्मक आलेख | नाट्य समीक्षाएं, व्यंग्य, साक्षात्कार एवं अन्य आलेख मथुरा, आगरा से प्रकाशित अमर उजाला, दैनिक जागरण, आज, डी एल ए आदि में |

कहानियां, समीक्षाएं, कविता, व्यंग्य- हंस, परिकथा, वर्तमान साहित्य, उद्भावना, समर लोक, वागर्थ, अभिव्यक्ति, वांग्मय के अलावा देश भर  की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित 

कहानी संग्रह -  "बंद कमरे की रोशनी", "रसीद नम्बर ग्यारह"

सम्पादन- प्रस्फुरण पत्रिका, 

 'बारह क़िस्से टन्न'  भाग १, 

 'बारह क़िस्से टन्न'  भाग ३,

 'बारह क़िस्से टन्न'  भाग ४
फिल्म - जन सिनेमा की फिल्म 'कैद' के लिए पटकथा, संवाद लेखन 

अवार्ड - सविता भार्गव स्मृति सम्मान २०१३, विशम्भर नाथ चतुर्वेदी स्मृति सम्मान २०१४ 

- पूर्व सचिव - संकेत रंग टोली 

सह सचिव - जनवादी लेखक संघ,  मथुरा 

कार्यकारिणी सदस्य - जनवादी लेखक संघ राज्य कमेटी (उत्तर प्रदेश)

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