अनीता के सभी लेख

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता) http://humrang.com/

“अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अपना परिचय आठवी कक्षा के आकाश और अंजली के रूप में दिया | ये दोनों ही बारी- बारी से गणित की स्पेलिंग के प्रत्येक लैटर को एक्सप्लेन कर रहे थे | इन दोनों छात्रों में बहुत ही गजब का सामंजस्य था | एक अपनी बात को खत्म करता तो दूसरा तुरंत आगे के शब्दों को पकड़ कर अपनी बात पूरी करता | आकाश और अंजलि के अनुसार, “गणित के जितने भी कन्सेप्ट हैं, वह प्रकृति में मिले हुए है जिनमें अंकों का विशेष महत्त्व है | तथा ज्ञान के टूल्स ही हमें गणित को समझने में आसान बनाते है |” इंसानी जीवन में वैज्ञानिक रचनात्मकता और लय को दर्शाती विज्ञान प्रदर्शनी पर ‘अनिता‘ की रिपोर्ट …

जीवन अनुभवों का सफ़र कहानी तक : समीक्षा (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

वर्तमान समय में जिन्दगी के व्यवहारिक धरातल पर वर्गीय संघर्ष, साम्प्रदायाकता, धार्मिक कट्टरता, जातीय दंश और सामाजिक राजनैतिक एवं पारिवारिक सूक्ष्म ताने-बाने व स्थाई पारस्परिक प्रतिमान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाहित करता हनीफ मदार का यह पहला ही कहानी संग्रह “बंद कमरे की रोशनी” पूरी तरह से परिपक्व और संभावनाओं से परिपूर्ण है | इसमें पात्रों द्वारा मानव स्वाभाव के अंतर मन को टटोलते हुए जमीनी स्तर पर चरित्रों के माध्यम से जीवन के अनेक पहलुओं पर चर्चा की गई है | संग्रह की ज्यादातर कहानियों के दृश्य ग्रामीण अंचल द्वारा संजोये गए है जो इस संग्रह की विशेषता है |

स्त्रियों के प्रति माइंड सैट करने की बात, एक दिन की नहीं होती: (डॉ० नमिता सिंह) http://humrang.com/

‘आज हम अपने देश की बात करें तो स्त्री आन्दोलन एकांगी चल रहा है | आज पूरे देश में रेप की घटनाएँ हो रही है| इस रूप में स्त्रियों के साथ जो व्यवहार पूरा समाज कर रहा है | अगर स्त्री आन्दोलन ऐसा ही चलता है तो वह जस्टिफाइड है क्योंकि समाज, स्त्रियों की एक सम्मानजनक स्थिति के लिए तैयार नहीं हो पा रहा है | इसके लिए बहुत बातचीत भी हो रही है | जब कभी कोई रेप की घटना प्रकाश में आ जाती है तो मोलीस्ट्रेशन की बात होती है, बड़ा हल्ला-गुल्ला भी होता है | कैंडिल मार्च भी निकाले जाते है | लेकिन जब हम स्त्रियों के प्रति माइंड सैट करने की बात करते तो वह एक दिन की बात नहीं होती | एक सुनियोजित रूप में वातावरण तैयार करने की बात होती है इसके लिए लम्बे प्रयास करने होते है |

पहला सुख निरोगी काया…. (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

पहला सुख निरोगी काया…. (अनीता चौधरी)

कुछ तो शर्म करो एवं अन्य कविता (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

पूंजीवादी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं, अवसर और बाज़ार के प्रभाव में नई गढ़ी जातीं और बिकतीं प्रेम व्याख्याओं की अनुसंधानिक प्रयोगशाला में निश्छल मानवीय प्रेम को तलाशती ‘अनीता चौधरी‘ की दो कविताएँ ……| – संपादक

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ…. http://humrang.com/

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम अभिव्यक्ति करती रचनाएं इंसानी और सामाजिक सरोकारों से भी विमुख नहीं हुई | वर्तमान बाजारी प्रभाव से बदलते सामाजिक ताने-बाने के बीच कविताई सौन्दर्य के साथ प्रेम की मानवीय व्यख्या रचतीं ‘अनीता चौधरी’ की कविताएँ……..

फेसबुक: नाटक (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

अनीता चौधरी की कलम कविता, कहानी, नाटक जैसी साहित्य की महत्वपूर्ण विधाओं पर सक्रिय है इस कड़ी में आपका एक बाल नाटक ….|

रहिमन पानी राखिये…: संपादकीय (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

रहिमन पानी राखिये…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

शो मस्ट गो ऑन, ‘सुखिया मर गया भूख से’: रिपोर्ट (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

शो मस्ट गो ऑन, ‘सुखिया मर गया भूख से’: रिपोर्ट (अनीता चौधरी)

प्रेम-गली अति सांकरी…: संपादकीय (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

प्रेम-गली अति सांकरी…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

महावारी या महामारी: संपादकीय (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

एक बात जो मुझे बचपन से लेकर आज तक मेरे ही घर में चुभती रही है, जब भी मुझे मासिक धर्म शुरू होता है मेरी माँ मुझे अपने पूजा वाले कमरे में नहीं जाने देती हैं। मुझे बहुत खराब लगता है । मैंने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन कभी-कभी व्यक्ति के सामने उसका साक्षर न होना भी बहुत भारी पड़ता है। आप बहुत कुछ उसे वैज्ञानिक तरीके से समझाना चाहते हैं लेकिन नहीं कर पाते है।…… संपादक

मैं क्यों पीछे रहूं…: लघुकथा (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

“पार्वती आज तो तू सुबह से ही भूखी-प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की दुआ कर रही है |” तो वह तुरंत बोली, “अरे, बीबी जी तुमसे क्या छुपाना ! तुम्हें क्या लगता है, जो पति रोज रात को शराब पीकर मुझे पीटता है उसकी लंबी उम्र की कामना करुँगी ? जिसमें मैं भूखी प्यासी व्रत रह रहकर मर जाऊं और उसकी उम्र लंबी होती जाए। वह दूसरा ब्याह कर लाए जिससे फिर उसे भी पीटता रहे। और तुम क्या समझती हो कि वह आज मुझे बिना पीटे मान जाएगा …?” ‘अनीता चौधरी’ की लघुकथा

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?: संपादकीय (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने…?: संपादकीय (अनीता चौधरी)

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..! संपादकीय आलेख (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

हम तो ऐसे ही देखेंगे…..! संपादकीय आलेख (अनीता चौधरी)

फिर लौट आई कामिनी: कहानी (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

सभ्यता एवं सभ्यता विकास की बराबर हिस्सेदार दुनिया की आधी आवादी को लेकर उसकी मुक्ति के साथ आधुनिक, शिक्षित और सभ्य समाज की परिभाषा गढ़ना हमें जितना आसान जान पड़ता है वहीँ वास्तविकता के धरातल पर उस मानसिकता को अपने व्यवहार में शामिल कर पाना उतना ही मुश्किल क्यों बना हुआ है ….? जब एक तरफ पश्चिमी सभ्यता, संस्कृति और बाज़ार को सामाजिक विकास का आधार मानकर उसे अनुकरणीय मानने की ज़िद है तो वहीँ सामाजिक, सांस्कृतिक मान-मर्यादाओं के नाम पर मानवीय अधिकारों के हनन और सामाजिक हासियाकरण को भी जायज ठहराना एक नई वहस और विरोधाभास पैदा करता है | इन्ही विरोधाभासों से जूझते हुए संघर्षीय चेतना के साथ बुनी हुयी अनीता चौधरी की कहानी | – संपादक

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता) http://humrang.com/

“अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अपना परिचय आठवी कक्षा के आकाश और अंजली के रूप में दिया | ये दोनों ही बारी- बारी से गणित की स्पेलिंग के प्रत्येक लैटर को एक्सप्लेन कर रहे थे | इन दोनों छात्रों में बहुत ही गजब का सामंजस्य था | एक अपनी बात को खत्म करता तो दूसरा तुरंत आगे के शब्दों को पकड़ कर अपनी बात पूरी करता | आकाश और अंजलि के अनुसार, “गणित के जितने भी कन्सेप्ट हैं, वह प्रकृति में मिले हुए है जिनमें अंकों का विशेष महत्त्व है | तथा ज्ञान के टूल्स ही हमें गणित को समझने में आसान बनाते है |” इंसानी जीवन में वैज्ञानिक रचनात्मकता और लय को दर्शाती विज्ञान प्रदर्शनी पर ‘अनिता’ की रिपोर्ट …

“प्रेमचंद से बातें”: रिपोर्ट (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

संकेत रंग टोली और कोवलेन्ट ग्रुप ने प्रेमचंद को उनके 135 वें जन्मदिवस पर लगभग ३ घंटे के कार्यक्रम में रचनात्मक तरीके से याद किया …..|

साल्व ऑफ़ लव: कहानी (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

बचपन से लेकर जीवनपरियन्त कितनी ही छोटी बड़ी घटनाएँ होती गुज़रती जाती हैं इन्हीं घटनाओं में से जीवंत मानवीय संवेदनाएं खोज निकालना ही लेखकीय जूनून या रचनात्मकता है | ऐसे ही लेखकीय दृष्टिकोण की परिचायक है ‘अनीता चौधरी’ की यह छोटी कहानी …….| – संपादक

परवाज़: कहानी (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में परम्परावादी होने जैसा ही है | तीब्र से तीब्रतम होते संचार और सोसल माद्ध्यम के समय में वैचारिक प्रवाह और भूचाल से गुजरती कहानी भी खुद को बदल रही है | वह गहरे प्रतीक और कला प्रतिबिम्बों के गोल-मोल भंवर में पाठक को न उलझाकर सीधे संवाद कर रही है | वह सामाजिक ताने-बाने में पल-प्रतिपल घटित होती उन सूक्ष्म घटनाओं को सीधे उठाकर इंसानी वर्गीकरण और संवेदनाओं को तलाश रही है बल्कि खुद के वजूद के लिए संघर्ष के साथ उठ खड़ी हो रही है | कहानी का यह बदलता स्वरूप साहित्यिक मानदंड को भले ही असहज करे किन्तु वक़्त की दरकार तो यही है | विश्व महिला दिवस पर ‘अनीता चौधरी’ की ऐसी ही एक कहानी…… | – संपादक

परवाज़ : कहानी (अनीता चौधरी) http://humrang.com/

जन्मदिन पर विशेष

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में परम्परावादी होने जैसा ही है | तीव्र से तीव्रतम होते संचार और सोसल माद्ध्यम के समय में वैचारिक प्रवाह और भूचाल से गुजरती कहानी भी खुद को बदल रही वह भी यदि गहरे प्रतीक और कला प्रतिबिम्बों के गोल-मोल भंवर में पाठक को न उलझाकर सीधे संवाद कर रही है वह सामाजिक ताने-बाने में पल-प्रतिपल घटित होती उन सूक्ष्म घटनाओं को सीधे उठाकर इंसानी वर्गीकरण और संवेदनाओं को तलाश रही है बल्कि खुद के वजूद के लिए संघर्ष के साथ उठ खड़ी हो रही है | कहानी का यह बदलता स्वरूप साहित्यिक मानदंड को भले ही असहज करे किन्तु वक़्त की दरकार तो यही है |

“हमरंग” की सह-संपादक 'अनीता चौधरी' की ऐसी ही एक कहानी......उनके जन्मदिवस पर बधाई के साथ | - संपादक

'अनीता चौधरी' की पाँच कविताएँ॰॰॰॰॰ http://humrang.com/

‘अनीता चौधरी’ की कविताओं से गुज़रना यूँ तो किसी शांत नदी से बातें करने का एहसास दिलाता है । मानो अपनी अतल गहराइयों में बड़े सामाजिक विचलन को समेटे, प्राकृतिक धैर्य के शांत आवरण को ओढ़े हुए, सागर से अपने प्रेम और उसकी तरफ़ चलते रहने की गाथा को, पूरी संजीदगी से बयां कर रहीं हों । इन कविताओं में यकायक प्रतीत होती हताशा यक़ीनन गहरे संदर्भों में सागर तट पर निश्छल प्रेम में दम तोड़ने जैसा होता है। आपकी कविताओं के शब्दों का भूगोल रचनात्मक रूप से ही सही, अपने तल से उठती सुनामी को मानवीय रूप में पुरुष सत्तात्मक सामाजिकता से होती चूक के परिणाम के रूप में व्याख्यायित कर उससे रूबरू करातीं हैं ।

हाल ही में प्रकाशित

मनुष्य होने के सन्दर्भ तलाशते लयबंध: समीक्षा (उमाशंकर सिंह परमार)

मनुष्य होने के सन्दर्भ तलाशते लयबंध: समीक्षा (उमाशंकर सिंह परमार)

उमाशंकर सिंह परमार 434 2019-06-02

बृजेश लय आधारित विधा के सफल और नामचीन कवि हैं। उनके लयबन्धों पर लिखना चुनौती भरा काम है। अमूमन गीतों और गज़लों की समीक्षा में व्याकरण व भावनात्मक आवेगों की प्रतिच्छाया सक्रिय रहती है आलोचक वाह-वाही की शैली में स्ट्रक्चर पर अपनी बात रखकर आलोचना की इतिश्री कर देते हैं। वह गीतों और बन्धों की वैचारिक विनिर्मिति और समाजशास्त्र पर जाना ही नहीं चाहते हैं। इससे हिन्दी कविता के क्षेत्र में गज़ल और गीतों को दोयम माना जाता रहा है। यह कमी विधा की नहीं है आलोचना की कमी है कि गीतों और बन्धों में समाजशास्त्रीय आलोचना को नहीं लागू किया गया वह अब भी अपने परम्परागत आलोचना प्रतिमानों द्वारा मूल्यांकित की जा रही है।

नोट-

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सम्पर्क सूत्र

हमरंग डॉट कॉम - ISSN-NO. - 2455-2011
संपादक - हनीफ़ मदार । सह-संपादक - अनीता चौधरी
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निकट - ढहरुआ रेलवे क्रासिंग यमुनापार,
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