‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप तो बाहर रहते हो इसलिए यह देख भी नहीं पाते कि लड़की क्या कर रही है। बात इशारे में ही समझने की है, नहीं तो ज्यादा दिन यह बात छुप नहीं पाएगी कि लड़की चरित्रहीन है और आप एक चरित्रहीन के बाप…. मिलूंगा तो सब बातें खुलकर बता दूंगा…. आगे आपकी मर्जी।”
नाम-सीमा सिंह
●जन्मतिथि- 1961
●शैक्षिक योग्यता- BA,BEd गोरखपुर विश्व विद्यालय।
●सम्प्रति- यूट्यूब पर पिछले कई वर्षों से हिन्दी साहित्य के प्रत्येक पीढ़ी के रचनाकारों के कहानी, उपन्यासों का अक्षरश: पाठन। प्रतियोगी परीक्षार्थियों व विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराना, अब तक लगभग 3500 कहानियों/उपन्यासों का पाठन पर कर चुकीं।