तीसमारखाँ: साहित्य, बाजारवाद और लेखकीय लालसाओं पर तीखा व्यंग्य
प्रो० विजय शर्मा की कहानी ‘तीसमार खाँ’ बाजारवाद, साहित्यिक प्रतिबद्धता, छद्म लेखकीय लालसाओं और सांस्कृतिक विडंबनाओं पर व्यंग्यात्मक शैली में […]
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अदृश्य दुभाषिया’, ‘आश्वासन की पीठ’ और ‘बिसुक गई है पीड़ा’ संवाद, आश्वासन, पीड़ा और मानवीय अनुभवों की गहरी परतों को
सीमा आरिफ की कविताओं में डिजिटल युग के युवाओं की बेचैनी, ह्रास होती संवेदनाएँ और प्रेम की गहरी तलाश का
अमृता ठाकुर की कहानी ‘अपने-अपने सच’ भावनात्मक शोषण, वर्गीय असमानता, दमित इच्छाओं और मानवीय रिश्तों के जटिल यथार्थ को संवेदनशीलता
प्रेम मानव जीवन की सबसे सुंदर अनुभूति है। हनीफ मदार की कहानी ‘अनुप्राणित’ प्रेम, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन को नई
चंद्रकांत देवताले की कविताएँ मनुष्यता, नैतिकता, संघर्ष और विरोधाभासी समाज के यथार्थ को गहराई से उजागर करती हैं। “दुनिया का
स्त्री आत्मनिर्भर क्यों बने? इस लेख में जानिए महिला आत्मनिर्भरता का महत्व, स्त्री सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बनने से जीवन में
अधेड़ औरतें’ एक संवेदनशील हिंदी कविता है जो लड़की से औरत बनने के बीच के उस कठिन पड़ाव को दिखाती
दूसरा पड़ाव’ एक मार्मिक हिंदी कहानी है जो जीवन के संघर्ष, अनुभव और नए मोड़ की कहानी कहती है। इस
जीवन भर पेटभर रोटी नहीं मिलती, लेकिन मरने के बाद सपनों के बाज़ार सज जाते हैं। ‘सुजाता तेवतिया’ का यह
रमज़ान के रोज़े और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच उलझा एक मनुष्य—यह कहानी आत्मग्लानि, आडंबर और सच्ची इंसानियत के द्वंद्व को
अशोक तिवारी की लंबी कविताएँ स्त्री जीवन के क्षणिक और स्थायी अनुभवों, कुंठा, अवसाद और प्रेम के भावात्मक आरोह-अवरोह का