दूसरा पड़ाव. कहानी (हनीफ़ मदार)
दूसरा पड़ाव कहानी हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता तो उनमें डूब जाने को बेकल होने […]
दूसरा पड़ाव कहानी हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता तो उनमें डूब जाने को बेकल होने […]
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण,
‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ
मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा
उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता
‘ सिया , सिया , सिया , ये महज किताबी बातें बोल रही हैं तू । मेरा यकीन है किे
अब जरा इस स्वप्नदर्शी मंगत राम के बारे में जान लीजिए। वह दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में रहता
वसंत से जब मेरी बात होती थी तो कहता था, तबस्सुम बेहद संजीदा और दानिशमंद लड़की है, इसलिए उसे पसंद
जश्न-ए-आज़ादी उसका घर इन नवधनाड्य और विकसित, अविकसित कॉलोनियों से दूर बंजर ज़मीन पर बसे उस मुहल्ले में था जो
ईदा (कहानी) Eedaa (Story) -हनीफ़ मदार(Hanif Madaar) बीस वर्ष लम्बा काल खंड भी ईदा को मेरी मनः-स्मृतियों से मिटा नहीं