मैं भी आती हूँ: कहानी सुनिए ‘सीमा सिंह’ की आवाज़ मेँ
एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े […]
एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े […]
एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
पाँच साल बाद गाँव लौटी कामिनी अपने प्रेम के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता की संपत्ति में बराबरी के हक
दूसरा पड़ाव – संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी है हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण,
‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ
मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा
उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता
‘ सिया , सिया , सिया , ये महज किताबी बातें बोल रही हैं तू । मेरा यकीन है किे
अब जरा इस स्वप्नदर्शी मंगत राम के बारे में जान लीजिए। वह दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में रहता