तीसमारखाँ: साहित्य, बाजारवाद और लेखकीय लालसाओं पर तीखा व्यंग्य
प्रो० विजय शर्मा की कहानी ‘तीसमार खाँ’ बाजारवाद, साहित्यिक प्रतिबद्धता, छद्म लेखकीय लालसाओं और सांस्कृतिक विडंबनाओं पर व्यंग्यात्मक शैली में […]
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अमृता ठाकुर की कहानी ‘अपने-अपने सच’ भावनात्मक शोषण, वर्गीय असमानता, दमित इच्छाओं और मानवीय रिश्तों के जटिल यथार्थ को संवेदनशीलता
प्रेम मानव जीवन की सबसे सुंदर अनुभूति है। हनीफ मदार की कहानी ‘अनुप्राणित’ प्रेम, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन को नई
दूसरा पड़ाव’ एक मार्मिक हिंदी कहानी है जो जीवन के संघर्ष, अनुभव और नए मोड़ की कहानी कहती है। इस
रमज़ान के रोज़े और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच उलझा एक मनुष्य—यह कहानी आत्मग्लानि, आडंबर और सच्ची इंसानियत के द्वंद्व को
एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े
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‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
पाँच साल बाद गाँव लौटी कामिनी अपने प्रेम के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता की संपत्ति में बराबरी के हक
दूसरा पड़ाव – संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी है हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण,