ISSN - 2455-2011
RNI - UPHIN/2017/74803

Humrang के आयोजन “बारह क़िस्से टन्न- 5” के आठवें दिन का क़िस्सा॰॰॰॰ मनोज रूपड़ा जी की जन्मस्थली तो गुजरात के जेतपुर क़स्बे की है किंतु शिक्षा और संस्कार दुर्ग (छत्तीसगढ़)में और रिहाइश 5 वर्ष मुम्बई के बाद इन दिनों नागपुर में है । लगभग सभी बड़ी-छोटी, प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कहानियाँ लगातार प्रकाशित होती रही हैं। यदि यह कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा कि मनोज रूपड़ा हिंदी कथा साहित्य के सबसे स्टाइलिश नामों में से एक है जिनकी कहानियाँ एक तरफ़ दिलचस्प किस्से सी रवानी रखती हैं तो दूसरी तऱफ ज्ञान-विज्ञान की नई दुनिया से भी पाठकों को रूबरू करवाती हैं। दरअसल, मनोज रूपड़ा उन अफ़सानानिगारों में से हैं जो अपने अफ़साने लिखते नहीं बल्कि कहते हैं कुछ उसी तरह जैसे एक शायर ग़ज़ल कहता है। चार कहानी संग्रह-‘दफन तथा अन्य कहानियाँ’, ‘साज़ नासाज़’, ‘टॉवर ऑफ साइलेन्स’ और ‘आमाजगाह’, दो उपन्यास- ‘प्रतिसंसार’ एवं ‘काले अध्याय’ तथा एक निबंध संग्रह ‘कला का आस्वाद’ हिन्दी साहित्य को देने वाले मनोज रूपड़ा को ‘इंदु शर्मा कथा पुरुष्कार’ व ‘वनमाली कथा सम्मान’ से नवाजा जा चुका है। Please Subscribe This Channel Visit Our Website – www.humrang.com

“बारह क़िस्से टन्न” कार्यक्रम के पहले दिन का क़िस्सा॰॰॰॰ विशाल के हल्केराम को कुरेदने , उसका सच जानने की प्रक्रिया में कहानी को दर्ज करना कि जीवन को मीठे-नमकीन स्वाद परोसने वाले इस आदमी के जीवन से स्वाद सिरे से गायब है। तीन स्तर साफ दिखाई देते हैं। स्वाद का ख़त्म होना, विशाल का व्यथित होना और पाठक की जिज्ञासा का एकम-एक होना ही कहानी की सफलता है। यह सब जानने के लिए सुनिए ‘कैलाश वानखेड़े’ की यह काहानी । इंदौर (मध्य प्रदेश) के कैलाश वानखेड़े सरकारी सेवारत हैं। आपके दो काहानी संग्रह ‘सुलगन’ और ‘सत्यापन’ आ चुके हैं। कहानी पर आपकी टिप्पणी दरकार है, ज़रूर कुछ कहिए। और इस चैनल को Subscribe करके हमें सहयोग करें। Please Subscribe this channel Visit Our Website – www.humrang.com

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