

पढ़ने-गुनने की जगह: कैसे वाचनालय और पुस्तकालय गढ़ते हैं व्यक्तित्व
1985 में चकमक से जुड़ाव ने किताबों और वाचनालयों के साथ एक नया रिश्ता बनाया। हर महीने पुस्तकालय में बिताए घंटों ने न सिर्फ पढ़ने-लिखने की आदत डाली, बल्कि व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव भी रखी। यह लेख बताता है कि कैसे वाचनालय और पुस्तकालय जीवन की दिशा बदल सकते

“सीमा सिंह” की आवाज़ मे सुनिए ‘हनीफ़ मदार’ की कहानी “चरित्रहीन”
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप

आखिर क्या लिखूं ? | जब दिल भरा हो लेकिन शब्द न मिलें
कितना तकलीफ़देह होता है उस स्वीकारोक्ति से खुद का साक्षात्कार, जहाँ आपको एहसास हो कि जिस चीज़ की प्राप्ति या तलाश में आप अपना पूरा जीवन और सम्पूर्ण व्यक्तित्व दाँव पर लगाए रहे, इस वक़्त में उसी चीज़ की अपनी सार्थकता ख़त्म हो रही है…| आखिर क्या लिखूं? | जब

प्रेम एवम् विद्रोह के बीच खड़े मनोहर श्याम जोशी, आलेख
सभ्यता के विकास के साथ ही प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां प्रचलित होने लगी थीं ! प्रेम और युद्ध मानव मन को आकर्षित करतें हैं यही कारण है की प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां आज भी लिखे जा रहें है और संभवतः सभ्यता के अंत तक

फिर लौट आई कामिनी – अपने हक के लिए लड़ती एक साहसी बेटी की कहानी
पाँच साल बाद गाँव लौटी कामिनी अपने प्रेम के लिए नहीं, बल्कि अपने पिता की संपत्ति में बराबरी के हक के लिए खड़ी होती है। यह कहानी है एक पढ़ी-लिखी लड़की की, जो पंचायत, जाति और पितृसत्ता के खिलाफ कानून और हिम्मत के साथ लड़ती है। पाँच साल पहले

दयामय की दया – लियो टॉल्स्टॉय की कहानियों में करुणा, मानवता और जीवन दर्शन
“दयामय की दया” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपी करुणा, नैतिकता और अंतःकरण की शक्ति का गहरा दर्पण है। लियो तोल्स्तोय की रचनाएँ सदैव मानव जीवन के सरल लेकिन अत्यंत गहन सत्य उजागर करती हैं। इस संकलन की पाँच कहानियाँ जीवन के नैतिक संघर्षों, दया, अहंकार, प्रेम

इदिका राय – की कविताएं
‘इदिका राय’ की कविताएँ हमारे समय की सबसे बेचैन और ईमानदार अभिव्यक्तियों में से हैं। ये कविताएँ किसी अलंकारिक शिल्प के मोह में नहीं उलझतीं, बल्कि अनुभव की खुरदरी सच्चाइयों से अपना सौंदर्य रचती हैं। इनकी रचनाओं में अनुभव, प्रतिरोध और आत्मस्वीकृति सहज रूप में समाविष्ट होतीं है । इनमें

दूसरा पड़ाव -संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी
दूसरा पड़ाव – संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी है हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता तो उनमें डूब जाने को बेकल होने लगता। और सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा नहीं होता बल्कि उन आंखों को जो भी देखता होगा निश्चित ही उसका यही हाल होता

खोया हुआ आदमी एवं अन्य कविताएं (कैलाश मनहर)
कैलाश मनहर की कविताएँ—समकालीन जीवन की संवेदनहीनता, सामाजिक पाखंड और मानवीय अनुभवों की गहराई को बेहद सहज लेकिन तीखे ढंग से उजागर करती हैं। ये कविताएँ केवल घटनाओंका वर्णन नहीं करतीं, बल्कि हमारे समय की नैतिक स्थिति पर एक शांत, पर प्रभावशाली टिप्पणी प्रस्तुत करती हैं। भाषा सादगीपूर्ण है, लेकिन