ISSN - 2455-2011
RNI - UPHIN/2017/74803
ऑडिओ
आवाज़

मैं भी आती हूँ: कहानी सुनिए ‘सीमा सिंह’ की आवाज़ मेँ

एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े हरिया के साथ उसकी पत्नी क्या कुछ ऐसा करती है जिससे अचंभा हो जाता है – कहानी “मैं भी आती हूँ”। सुनिए कहानी “सीमा सिंह” की आवाज़ मेँ मैं भी

Read More »
Hindi me prem kavita
कविता

आओ कि सुंदर को सुंदरतम बना दें – प्रेम पर हिन्दी कविता

“यह भावनात्मक हिंदी कविता प्रेम, सकारात्मक सोच और जीवन को बेहतर बनाने का संदेश देती है। पढ़ें और अपने दिल में उम्मीद की नई रोशनी जगाएं।” मानव जीवन की संवेदनाओं एवं कोमल भावों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देती पूरे आत्मविश्वास से भरी ‘नीलम स्वर्णकार’ की कुछ कविताएँ ……जैसे एक कोशिश घोर

Read More »
Main bhi Ati Hoon
कहानी

मैं भी आती हूँ: किसान, ज़मीन और विश्वासघात की मार्मिक कहानी

एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े हरिया के साथ उसकी पत्नी क्या कुछ ऐसा करती है जिससे अचंभा हो जाता है – कहानी “मैं भी आती हूँ”। मैं भी आती हूं….! हरिया पेड़ के नीचे बैठा

Read More »
ek krantikari ki katha
व्यंग्य

क्रांतिकारी की कथा : राजनीति और समाज का व्यंग्यात्मक सच

‘क्रांतिकारी की कथा’ एक तीखा व्यंग्य है जो समाज, सत्ता और दिखावटी क्रांति की मानसिकता को उजागर करता है। यह लेख आज के दौर की सच्चाई को आईना दिखाता है। क्रांतिकारी की कथा अन्य व्यंग्य पढ़ें ‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था। खूब पढ़ा-लिखा युवक। स्वस्थ सुंदर। नौकरी भी अच्छी। विद्रोही।

Read More »
Chand ke par ek chabhi
अवधेश प्रीत

विकासोन्मुख गाँव की जातिगत समस्या : ‘चाँद के पार एक चाभी’ का सामाजिक विश्लेषण

विकास की ओर बढ़ते भारतीय गाँवों में जातिगत भेदभाव अब भी एक गंभीर समस्या है। ‘चाँद के पार एक चाभी’ कहनी के माध्यम से ग्रामीण समाज की इस सच्चाई का गहन विश्लेषण। विकासोन्मुख गांव की जातिगत समस्या है : ‘चाँद के पार एक चाभी’ ‘अवधेश प्रीत की कहानी ‘चाँद के पार

Read More »
padhane Gunane ki Jagah
आलेख

पढ़ने-गुनने की जगह: कैसे वाचनालय और पुस्तकालय गढ़ते हैं व्यक्तित्व

1985 में चकमक से जुड़ाव ने किताबों और वाचनालयों के साथ एक नया रिश्ता बनाया। हर महीने पुस्तकालय में बिताए घंटों ने न सिर्फ पढ़ने-लिखने की आदत डाली, बल्कि व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव भी रखी। यह लेख बताता है कि कैसे वाचनालय और पुस्तकालय जीवन की दिशा बदल सकते

Read More »
Charitrheen
आवाज़

“सीमा सिंह” की आवाज़ मे सुनिए ‘हनीफ़ मदार’ की कहानी “चरित्रहीन”

‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप

Read More »
Hanif Madaar
आलेख

आखिर क्या लिखूं ? | जब दिल भरा हो लेकिन शब्द न मिलें

कितना तकलीफ़देह होता है उस स्वीकारोक्ति से खुद का साक्षात्कार, जहाँ आपको एहसास हो कि जिस चीज़ की प्राप्ति या तलाश में आप अपना पूरा जीवन और सम्पूर्ण व्यक्तित्व दाँव पर लगाए रहे, इस वक़्त में उसी चीज़ की अपनी सार्थकता ख़त्म हो रही है…| आखिर क्या लिखूं? | जब

Read More »
Manohar-Shyam
आलेख

प्रेम एवम् विद्रोह के बीच खड़े मनोहर श्याम जोशी, आलेख

सभ्यता के विकास के साथ ही प्रेम और युद्ध से सम्बन्धित किस्से कहानियां प्रचलित होने लगी थीं ! प्रेम और युद्ध मानव मन को आकर्षित करतें हैं यही कारण है की प्रेम  और युद्ध से सम्बन्धित  किस्से कहानियां आज भी लिखे जा रहें है और संभवतः सभ्यता के अंत तक

Read More »
error: Content is protected !!
Scroll to Top