
‘इदिका राय’, की कविताएँ
‘इदिका राय’ की कविताएँ हमारे समय की सबसे बेचैन और ईमानदार अभिव्यक्तियों में से हैं। ये कविताएँ किसी अलंकारिक शिल्प के मोह में नहीं उलझतीं, बल्कि अनुभव की खुरदरी सच्चाइयों से अपना सौंदर्य रचती हैं। इनकी रचनाओं में अनुभव, प्रतिरोध और आत्मस्वीकृति सहज रूप में समाविष्ट होतीं है । इनमें

दूसरा पड़ाव. कहानी (हनीफ़ मदार)
दूसरा पड़ाव कहानी हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता तो उनमें डूब जाने को बेकल होने लगता। और सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा नहीं होता बल्कि उन आंखों को जो भी देखता होगा निश्चित ही उसका यही हाल होता होगा, यह बात मैं इतने आत्म-विश्वास से

खोया हुआ आदमी एवं अन्य कविताएं (कैलाश मनहर)
कैलाश मनहर की कविताएँ—समकालीन जीवन की संवेदनहीनता, सामाजिक पाखंड और मानवीय अनुभवों की गहराई को बेहद सहज लेकिन तीखे ढंग से उजागर करती हैं। ये कविताएँ केवल घटनाओंका वर्णन नहीं करतीं, बल्कि हमारे समय की नैतिक स्थिति पर एक शांत, पर प्रभावशाली टिप्पणी प्रस्तुत करती हैं। भाषा सादगीपूर्ण है, लेकिन

रश्मि सिंह की कविताएं—
रश्मि सिंह की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता के उस सशक्त पक्ष को उजागर करती हैं जहाँ अनुभूति, वैचारिक प्रतिबद्धता और आत्मसंघर्ष एक सम्यक साहित्यिक संरचना में विन्यस्त होते हैं। इन कविताओं में कवयित्री का स्वर कहीं प्रतिज्ञात्मक है, कहीं आत्मालोचनात्मक, कहीं सामाजिक प्रश्नाकुलता से भरा हुआ, तो कहीं अस्तित्वबोध की

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान (Namita Singh)
“योरोप में श्रमिक वर्ग के उदय और उनके संघर्ष एक ओर थे तो मध्यवर्ग की जागरुक स्त्रियों की बढ़ रही सक्रियता का परिणाम हुआ कि वहाँ समान अधिकारों के लिये संघर्ष की शुरूआत वोट के अधिकार के लिये हुई और उसके लिये प्रदर्शन आदि का सिलसिला भी शुरू हुआ।”………. ‘डा०

चरित्रहीन (कहानी)
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप

महाराज की बीमारी (व्यंग्य)- ब्रजेश कानूनगो
चिकित्सा विज्ञान में प्रावीण्यता अर्जित किए और निपुण राजवैद्य बीमारी का सही कारण अपने सभी परीक्षणों के बावजूद पता नहीं लगा पा रहे थे। पड़ोसी राज्यों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया। मगर सफलता हाथ न लगी। दिनों दिन महाराज का चेहरा पीला पड़ता जा रहा था। पहले सी

श्रृंखला (लंबी कहानी)
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण, निर्वासन उपन्यास के लेखक, हिंदी के यशस्वी कथाकार “अखिलेख” जी की आज पढ़िए हमरंग पर एक लंबी कहानी …..| – संपादक Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp श्रृंखला बाबा धोती, कुर्ता और बंद

चाँद के पार एक चाभी (कहानी)
‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ विमर्श ही नहीं होता है बल्कि भूत, भविष्य के साथ-साथ वर्तमान का भी एक प्रतिरूप नज़र आता है. उन्होंने अपनी लंबी कहानी “चाँद के पार एक चाभी” में भी बदलते

