

चुटकी-चुटकी प्रेम॰॰॰
उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता है यही सोचकर वह खड़ा हुआ है | लेकिन, तब तक उसकी ट्रेन आ गई और, “मम्मी ट्रेन आ गई है बाद में बात करती हूँ, नमस्ते |” कहती हुई

अंधी गली का मुहाना
भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती ‘अशोक तिवारी‘ की कविता ……. अंधी गली का मुहाना ये कौन सी गली में आ गए हमकौन सी वादियों में घिर गएकि कुछ सुझाई नहीं देता?साँस ही नहीं ली जातीये कौन सा रास्ता हैजो अंधी सुरंग

क्रोध का प्रबंधन
वक्ती हालातों, ज़ज्बातों और संवेदनाओं को शब्दों के सहारे कविता में पिरोने का सार्थक प्रयास करतीं ‘रूपाली सिन्हा’ की दो कविताएँ …….| – संपादक क्रोध का प्रबंधन प्रबंधन के इस युग मेंसिखाया जा रहा हैक्रोध का प्रबंधन भीताकि सहनशक्ति बढ़ सकेसंवेदनाएँ हो जाएँ कुंदऔर सरोकार कोमारा जा सके बेमौतअशांति के दूत

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ
“आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटिश शासन और सब मामलों में कानून बना सकता है और

गुस्से की गूँज
यद्यपि गुस्से को पी जाने का सटीक फार्मूला हमारे संत महात्मा बहुत पहले से बता गए हैं लेकिन अब ऐसा सम्भव नही रह गया है, क्योंकि पीने के लिए अब बहुत सी चीजें उपलब्ध हैं। गुस्सा पीना पिछडा हुआ और अप्रासंगिक तरीका रह गया है। ‘ब्रजेश कानूनगो‘ का व्यंग्य ……|

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ
आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त की है। हालांकि धर्म सम्मत सामाजिक नियम-कानूनों ने स्त्री को घर की चारदीवारी के भीतर सीमित कर

“ये है मथुरा मेरी जान….”
तो दोस्तों ! मैं मथुरा का निवासी हूँ। उस प्रेम नगरी मथुरा की बात कर रहा हूँ जिसके प्रेम में सय्यद इब्राहीम रसखान बन जाता है जो किसी भी रूप में इस ब्रज की माटी को छोड़ना नहीं चाहता . (आलेख में प्रयुक्त सभी चित्र गूगल से साभार ) “ये

उतरती हुई धूप
‘ सिया , सिया , सिया , ये महज किताबी बातें बोल रही हैं तू । मेरा यकीन है किे रसलोलुप पुरूषों की गिद्ध नजर हमेशा कोमल औरतों को निशान साध उनका पीछा करती रहतीं। मनचाही लड़की न मिलने पर वे जल भुन कर उसे शिकार बनाकर मार डालने से

कैसी शिक्षा कैसा ज्ञान, भाषा पर है पूर्ण विराम|
कैसी शिक्षा कैसा ज्ञान, भाषा पर है पूर्ण विराम| भारत विविधताओं वाला देश है यहाँ पर खान-पान, रहन-सहन और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अलावा भाषाओं में भी विविधताएं देखने को मिलती है | अलग-अलग राज्यों कि प्रादेशिक भाषाएँ होने के बावजूद भी एक प्रदेश में भी अनेक स्थानीय भाषाएँ बोली जाती