अधेड़ औरतें: स्त्री दुख की मार्मिक हिंदी कविता
अधेड़ औरतें’ एक संवेदनशील हिंदी कविता है जो लड़की से औरत बनने के बीच के उस कठिन पड़ाव को दिखाती […]
TKjNCP4frpJsub1QbSYMGphQaujBY6Of8-pr1kL7kJQ
Skip to contentअधेड़ औरतें’ एक संवेदनशील हिंदी कविता है जो लड़की से औरत बनने के बीच के उस कठिन पड़ाव को दिखाती […]
जीवन भर पेटभर रोटी नहीं मिलती, लेकिन मरने के बाद सपनों के बाज़ार सज जाते हैं। ‘सुजाता तेवतिया’ का यह
रमज़ान के रोज़े और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच उलझा एक मनुष्य—यह कहानी आत्मग्लानि, आडंबर और सच्ची इंसानियत के द्वंद्व को
एक किसान की ज़मीन, विश्वासघात और टूटते सपनों की मार्मिक कहानी। नीम के पेड़ और सम्मान की रक्षा में खड़े
‘क्रांतिकारी की कथा’ एक तीखा व्यंग्य है जो समाज, सत्ता और दिखावटी क्रांति की मानसिकता को उजागर करता है। यह
1985 में चकमक से जुड़ाव ने किताबों और वाचनालयों के साथ एक नया रिश्ता बनाया। हर महीने पुस्तकालय में बिताए
“योरोप में श्रमिक वर्ग के उदय और उनके संघर्ष एक ओर थे तो मध्यवर्ग की जागरुक स्त्रियों की बढ़ रही
चिकित्सा विज्ञान में प्रावीण्यता अर्जित किए और निपुण राजवैद्य बीमारी का सही कारण अपने सभी परीक्षणों के बावजूद पता नहीं
तो दोस्तों ! मैं मथुरा का निवासी हूँ। उस प्रेम नगरी मथुरा की बात कर रहा हूँ जिसके प्रेम में