ISSN - 2455-2011
RNI - UPHIN/2017/74803
From Google
कहानी

एक छोटा-सा मजाक (कहानी)

मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है …… ऐसी ही एक कहानी …| – संपादक  एक छोटा-सा मजाक सरदियों की ख़ूबसूरत दोपहर… सरदी बहुत तेज़

Read More »
Geeta shri
साक्षात्कार

मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं…

पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति का घोषणापत्र बनाती हैं बल्कि स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को पूरी शिद्दत से सामने लाती हैं. वर्ष के अंत में आज ‘गीताश्री‘ के जन्मदिन पर हमरंग द्वारा बधाई स्वरूप….गीताश्री से

Read More »
Photo- Ayaan Madaar
लेखक

चुटकी-चुटकी प्रेम॰॰॰

उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता है यही सोचकर वह खड़ा हुआ है | लेकिन, तब तक उसकी ट्रेन आ गई और, “मम्मी ट्रेन आ गई है बाद में बात करती हूँ, नमस्ते |” कहती हुई

Read More »
Photo- Ayaan Madaar
कविता

अंधी गली का मुहाना

भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती ‘अशोक तिवारी‘ की कविता ……. अंधी गली का मुहाना ये कौन सी गली में आ गए हमकौन सी वादियों में घिर गएकि कुछ सुझाई नहीं देता?साँस ही नहीं ली जातीये कौन सा रास्ता हैजो अंधी सुरंग

Read More »
Photo - Ayaan Madaar
लेखक

क्रोध का प्रबंधन

वक्ती हालातों, ज़ज्बातों और संवेदनाओं को शब्दों के सहारे कविता में पिरोने का सार्थक प्रयास करतीं ‘रूपाली सिन्हा’ की दो कविताएँ …….| – संपादक  क्रोध का प्रबंधन प्रबंधन के इस युग मेंसिखाया जा रहा हैक्रोध का प्रबंधन भीताकि सहनशक्ति बढ़ सकेसंवेदनाएँ हो जाएँ कुंदऔर सरोकार कोमारा जा सके बेमौतअशांति के दूत

Read More »
साभार Canava
लेखक

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ

“आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटिश शासन और सब मामलों में कानून बना सकता है और

Read More »
साहित्य

गुस्से की गूँज

यद्यपि गुस्से को पी जाने का सटीक फार्मूला हमारे संत महात्मा बहुत पहले से बता गए हैं लेकिन अब ऐसा सम्भव नही रह गया है, क्योंकि पीने के लिए अब बहुत सी चीजें उपलब्ध हैं।  गुस्सा पीना पिछडा हुआ और अप्रासंगिक तरीका रह गया है। ‘ब्रजेश कानूनगो‘ का व्यंग्य ……| 

Read More »
Image from Canava
लेखक

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ

आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त की है। हालांकि धर्म सम्मत सामाजिक नियम-कानूनों ने स्त्री को घर की चारदीवारी के भीतर सीमित कर

Read More »
Mathura photo from Google
लेखक

“ये है मथुरा मेरी जान….”

तो दोस्तों ! मैं मथुरा का निवासी हूँ। उस प्रेम नगरी मथुरा की बात कर रहा हूँ जिसके प्रेम में सय्यद इब्राहीम रसखान बन जाता है जो किसी भी रूप में इस ब्रज की माटी को छोड़ना नहीं चाहता .  (आलेख में प्रयुक्त सभी चित्र गूगल से साभार ) “ये

Read More »

Follow us on facebook (official Page) and other social platfrom

error: Content is protected !!
Scroll to Top