ISSN - 2455-2011
RNI - UPHIN/2017/74803

‘इदिका राय’ की कविताएँ हमारे समय की सबसे बेचैन और ईमानदार अभिव्यक्तियों में से हैं। ये कविताएँ किसी अलंकारिक शिल्प के मोह में नहीं उलझतीं, बल्कि अनुभव की खुरदरी सच्चाइयों से अपना सौंदर्य रचती हैं। इनकी रचनाओं में अनुभव, प्रतिरोध और आत्मस्वीकृति सहज रूप में समाविष्ट होतीं है । इनमें भाषा के सौंदर्य का मोह नहीं बल्कि सच का वजन है— और यही इन्हें हमारे समय की ज़रूरी कविताएँ हैं जो ‘इदिका रे’ को एक संभावित लेखिका के रूप में दिखाता है।

1- लगता है ये शहर दिल्ली है

बहुत सारे लोगों को एक साथ देखा है

बड़ी बड़ी इमारतों में,

लोगों को खुद को सहेजते देखा है,

घर का एक कोना, बैग में तो पैक कर लिया

जैसे कुछ ख्वाब, हर सफर में साथ रख लिये हों

बात ज़रा अचंभे की तो है,

कि सभी को अपने स्तिथि का जवाब ये शहर ही लगा

ये सवाल का जवाब खोजते-खोजते

मैं खुद एक सवाल बन गयी, और

इस भीड़ का बन गयी मैं भी एक तिनका ।

 

अब सफर बोटैनिकल से राजीव चौक तक का हो

या हौज़ खास से जीटीबी  तक

मेट्रो की दास्ताँ, एक अलग आलम है

जहाँ की दफ़्न हवा पूरे शहर का रुख बदलती है

जहाँ हर चलती चीज़ की एक अनिश्चित मंज़िल है

जहाँ हज़ारों कहानियों में भी

आपको अपनी कहानी अकेली नज़र आये

ये आलम, दफ़्न कब्र में दौड़ता खून है ।

 

हाँ ! ये शहर अंजान सा लगता था

लगता है/था कि,

इस रफ़्तार में, इस बहते बहाव में

एक धीमा क़दम, कहीं

मुझसे ही मेरी साया न छीन ले ।

खैर !! मुलाकातें बढ़ती गयीं

और टकराव हुआ, हम-उम्र हमराहों के साथ

मेरी जिंदगी के कुछ पन्ने अचानक से बढ़ने लगे

रिज से लोधी गार्डन, और सुदामा से मदर डेरी तक

के सफरनामे बढ़ने लगे,

चार-दिवारी में सिमटे हुए कमरे से निकल कर

छोटी गलियों में खाने की दुकान खोजने

के किस्से गढ़ने लगे।

 

यह शहर है जहाँ हर नया बीज पनपता है

ये शहर है जहाँ ढ़ेरों राज़ शेल्फ में मेहफ़ूज़ रखे है,

ये शहर है जहाँ सीधी लकीर की बनावट होती है

ये शहर है जहाँ सवालों के बादल ज़मीं पर छाए हैं

कई सवाल थे, मगर बहुतों का जवाब वही॰॰॰॰॰॰

ये दिल्ली है मेरे यार!!

Idika Ray

2- काश भीग जाते तुम भी

काश भीग जाते तुम भी

उस शांतिपूर्ण रात की

घनी बारिश में

जो सिर्फ तुम्हारे लिए

शांति से भरपूर थी,

शायद कुछ पाप धुल जाते

वो पाप जिनसे तुम्हारी

शान-ओ-शौकत बढ़ती है।

 

और मैं,

मैं एकदम स्तब्ध,थमी हुई

जैसे रुक जाते हैं लोग

भरी बारिश में एक दम असहाय

और तुम? तुम गरज रहे थे मुझ पर

उन दर्दनाक, चीरती हुई

चारों ओर फैलती

बिजलियों की तरह।

तुम गरज रहे थे,

दुनिया की मर्दानगी का भार

उठाते बादलों-से ,

जैसे सचमुच,

एक घृणा का पात्र थी मैं 

तुम्हारे लिए।

 

वो एक

भयानक तूफ़ान था

जो इस वक्त में

एक कौंधते, झुलसे हुए

सवाल को जन्म देता है,

“अगर तुम मेरी जगह होते,

और मैं तुम्हारी,

तो कैसा लगता तुम्हे? “

3- फ़ासला उस चाँद से

वक़्त के साथ पसरती दूरी

और दूरी से बढ़ता

फ़ासला उस चाँद से ,

शायद कुछ गर्त कम नज़र आते

शायद कुछ गहराइयाँ उथली हो जातीं

लेकिन चमक बरकरार रहती

आकर्षक रहती,

कभी – कभी दूरियाँ विचारों को

“बढ़िया और उम्दा” में तब्दील कर देतीं हैं

और नज़दीकियां, सवालों से घेर लेती हैं,

बेहतर है सवालों से आवृत हो जाना

और उस चलचित्रात्मक आसमां में

अलहदा चाँद को तराश लेना।

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4- कुछ बिखरे अंश

कुछ बिखरे अंशों को

रोज समेटता

हर विस्मय को झेलता हूं

जिंदगी की पंचर साइकिल का पहिया हूं

फटे कपड़े का थेगरा हूं

उधड़ी जेब में रखा चिल्लर हूं

घर की मुस्कुराहट हूं

किराने की दुकान का हिसाब हूं

धूप में रिसती बूंद हूं

सिगरेट से आहत होते फेफड़े हूं

न जाने कितने किरदारों का निर्देशक हूं,

अब दर्शकों मे हो या मंच परे

मैं खोजता हूं उस लेखक को

जिसने मेरी जिंदगी का नाट्य रूपांतरण किया।

आज फिर से, एक उपन्यास के

कुछ पन्ने बढ़े हैं,

ऐसा उपन्यास जिसमे जिक्र

उन ईंटों का है,

जो बिना सीमेंट के भी मजबूत घर का हिस्सा हैं।

उन गलियों के बहते हुए वक्त

का है,

उन तजुर्बों का है,

उस लाठी और खाट के छूट जाने का है,

इस उपन्यास में जिक्र उन शब्दों का भी है

जो बिना पढ़े भी ,मस्तिष्क पर छाह जाएं।

 

हां कुछ पन्ने भरे होकर भी कोरे लग सकते हैं

कुछ पन्ने रंगीन लग सकते हैं

कुछ पन्ने खुद से जुड़े,

वीराने मे साथी और चहल पहल में मुस्कुराहटों की तरह लग सकते हैं।

ये उपन्यास दिखने में महज़ सादा हो,

लेकिन पढ़ने में एक श्रृंखला बन जाती है।

क्योंकि ये दास्तां हम सभी से जुडे़

एक साथी, एक प्रेक्षक की है।

Picture of इदिका राय

इदिका राय

फिलहाल दिल्ली विश्विद्यालय से स्नातक कर रही हैं ।
हिंदी साहित्य लिखने एवं पढ़ने में काफी रुचि | कलम और कागज़ का रिश्ता हमेशा से ही सुकून जैसा रहा है। बचपन से अभिनय का शौक के चलते 'प्रकाश झा प्रॉडक्शन' की फिल्म 'मटटो की साइकिल' मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर चुकीं हैं |

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