तीसमारखाँ: साहित्य, बाजारवाद और लेखकीय लालसाओं पर तीखा व्यंग्य
प्रो० विजय शर्मा की कहानी ‘तीसमार खाँ’ बाजारवाद, साहित्यिक प्रतिबद्धता, छद्म लेखकीय लालसाओं और सांस्कृतिक विडंबनाओं पर व्यंग्यात्मक शैली में […]
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