

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान (Namita Singh)
“योरोप में श्रमिक वर्ग के उदय और उनके संघर्ष एक ओर थे तो मध्यवर्ग की जागरुक स्त्रियों की बढ़ रही सक्रियता का परिणाम हुआ कि वहाँ समान अधिकारों के लिये संघर्ष की शुरूआत वोट के अधिकार के लिये हुई और उसके लिये प्रदर्शन आदि का सिलसिला भी शुरू हुआ।”………. ‘डा०

चरित्रहीन (कहानी)
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर भेज रहा हूं, और किसी को बताई भी नहीं है। बात दरअसल यह है कि सरला अब बड़ी हो गयी है अब उसके हाथ पीले कर दो…. वैसे भी आप

महाराज की बीमारी (व्यंग्य)- ब्रजेश कानूनगो
चिकित्सा विज्ञान में प्रावीण्यता अर्जित किए और निपुण राजवैद्य बीमारी का सही कारण अपने सभी परीक्षणों के बावजूद पता नहीं लगा पा रहे थे। पड़ोसी राज्यों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया। मगर सफलता हाथ न लगी। दिनों दिन महाराज का चेहरा पीला पड़ता जा रहा था। पहले सी

श्रृंखला (लंबी कहानी)
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण, निर्वासन उपन्यास के लेखक, हिंदी के यशस्वी कथाकार “अखिलेख” जी की आज पढ़िए हमरंग पर एक लंबी कहानी …..| – संपादक Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp श्रृंखला बाबा धोती, कुर्ता और बंद

चाँद के पार एक चाभी (कहानी)
‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ विमर्श ही नहीं होता है बल्कि भूत, भविष्य के साथ-साथ वर्तमान का भी एक प्रतिरूप नज़र आता है. उन्होंने अपनी लंबी कहानी “चाँद के पार एक चाभी” में भी बदलते

एक छोटा-सा मजाक (कहानी)
मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनंत गहराइयों में उतरती जाती है …… ऐसी ही एक कहानी …| – संपादक एक छोटा-सा मजाक सरदियों की ख़ूबसूरत दोपहर… सरदी बहुत तेज़

मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं…
पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति का घोषणापत्र बनाती हैं बल्कि स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को पूरी शिद्दत से सामने लाती हैं. वर्ष के अंत में आज ‘गीताश्री‘ के जन्मदिन पर हमरंग द्वारा बधाई स्वरूप….गीताश्री से

चुटकी-चुटकी प्रेम॰॰॰
उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता है यही सोचकर वह खड़ा हुआ है | लेकिन, तब तक उसकी ट्रेन आ गई और, “मम्मी ट्रेन आ गई है बाद में बात करती हूँ, नमस्ते |” कहती हुई

अंधी गली का मुहाना
भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती ‘अशोक तिवारी‘ की कविता ……. अंधी गली का मुहाना ये कौन सी गली में आ गए हमकौन सी वादियों में घिर गएकि कुछ सुझाई नहीं देता?साँस ही नहीं ली जातीये कौन सा रास्ता हैजो अंधी सुरंग