इदिका राय – की कविताएं
‘इदिका राय’ की कविताएँ हमारे समय की सबसे बेचैन और ईमानदार अभिव्यक्तियों में से हैं। ये कविताएँ किसी अलंकारिक शिल्प […]
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दूसरा पड़ाव – संघर्ष ,उम्मीद और बदलाव की कहानी है हनीफ़ मदार की – ‘जब भी उसकी आंखों को देखता
कैलाश मनहर की कविताएँ—समकालीन जीवन की संवेदनहीनता, सामाजिक पाखंड और मानवीय अनुभवों की गहराई को बेहद सहज लेकिन तीखे ढंग
रश्मि सिंह की कविताएँ समकालीन हिंदी कविता के उस सशक्त पक्ष को उजागर करती हैं जहाँ अनुभूति, वैचारिक प्रतिबद्धता और
“योरोप में श्रमिक वर्ग के उदय और उनके संघर्ष एक ओर थे तो मध्यवर्ग की जागरुक स्त्रियों की बढ़ रही
‘ड्राइवर साहब, आप मुझे हितैशी समझें या दुश्मन परन्तु बात सच है मुंह से नहीं कह पाया इसलिए लिख कर
चिकित्सा विज्ञान में प्रावीण्यता अर्जित किए और निपुण राजवैद्य बीमारी का सही कारण अपने सभी परीक्षणों के बावजूद पता नहीं
चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण,
‘अवधेश प्रीत‘ अपनी कहानियों में सामाजिक समस्याओं को बहुत ही मार्मिक रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनकी कहानियों में सिर्फ
मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व‘ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा
पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति
उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता